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हकीकत पर नजर नहीं, दावे भरपूर
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
Updated Thu, 07 Jan 2016 02:21 AM IST
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पांच आतंकी हमलों के अलावा हाल के महीनों में शहर में धर्म को केंद्रित कर लगातार दो बार बवाल हुए।
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कैंटोनमेंट, काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और संकट मोचन मंदिर में निजी सुरक्षा कर्मियों की निगरानी को छोड़ दें तो बाकी शहर में सुरक्षा चौकसी के नाम पर खानापूर्ति ही अधिक नजर आती है।
विशेष मौकों को छोड़ दिया जाए तो शहर की सुरक्षा को लेकर वो चौकसी नजर नहीं आती, जिसकी जरूरत अरसे से जताई जा रही है।
पर्यटन के नजरिये से काशी की वैश्विक पटल पर नई पहचान भी तभी मजबूत होगी जब यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ ही सुरक्षा प्रबंध बेहतर होंगे।
निगरानी के लिए न सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया, न सेंट्रल मॉनीटरिंग सिस्टम सहित अन्य अत्याधुनिक संसाधनों से पुलिस लैस हो पाई है।
उपलब्ध संसाधनों के आधार पर निगरानी के प्रयासों को सुरक्षा से जुड़े जानकार भी पर्याप्त नहीं मानते। सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की कमी भी एक बड़ा संकट बनी है।
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जरूरत के अनुरूप सिपाही और दरोगाओं की तैनाती न होने से दबी जुबान कई थानेदार कहते हैं कि हम वारदातों के आरोपी पकड़ें, जमीन से जुड़े मामले सुलझाएं या फिर सुरक्षा व्यवस्था देखें।
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हालांकि विभागीय उच्चाधिकारियों का कहना है कि जिले में पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। आधुनिक सुरक्षा संसाधनों के लिए भी शासन स्तर पर पहल चल रही है।