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खजाना पाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार, स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन करने पहुंचे लाखों भक्त

Sat, 26 Oct 2019 01:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 26 Oct 2019 01:17 PM IST
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Long queues of devotees gathered to see golden mother ma Annapurna in varanasi
मां अन्नपूर्णा। - फोटो : अमर उजाला

अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्धा भिक्षां देहि च पार्वती। शिव की नगरी काशी में स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा ने दोनों हाथों से भक्तों पर अन्न-धन की बरसात की। सुरसरि के तट पर डुबकी लगाने के बाद आस्थावानों का रेला मंदिर की ओर चल दिया। शुक्रवार की तरह शनिवार सुबह को भी माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है।

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शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक ही 70 हजार से ज्यादा भक्त मां के श्री चरणों में शीश नवा चुके थे। दर्शन पूजन का सिलसिला रात 11 बजे तक निरंतर चलता रहा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर भोर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी, उपमहंत शंकर पुरी ने मां के स्वर्णमयी प्रतिमा की आरती उतारी। मंदिर के आचार्यों ने देवी और खजाने का पूजन किया। आरती पूरी होने के बाद 4:30 बजे मंदिर का कपाट भक्तों के लिए खोल दिया गया।
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कपाट खुलते ही मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठा। घंटों कतारबद्ध लोगों को माता ने जब दर्शन दिया तो वो ऐसे विभोर हो उठे मानो दुनिया का सब कुछ उन्हें हासिल हो गया हो। इस बीच दोपहर 12:30 बजे भोग आरती हुई। मंदिर प्रबंधन के अनुसार रात नौ बजे तक एक लाख 20 हजार दर्शनार्थियों ने दर्शन किए।



जन्मों के कष्ट होते हैं दूर : महंत रामेश्वर पुरी
मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने बताया कि अति प्राचीन काल से यह परंपरा चली आ रही है। धनतेरस के दिन जो भी भक्त मां के दर्शन कर उनका खजाना हासिल करता है उसे आजीवन ही नहीं जन्म जन्मांतर तक किसी तरह का कोई कष्ट नहीं होता। न धन की कमी होती है न अन्न की।



कीर्ति लाभ मिलता है और भक्त हमेशा सारे संतापों से दूर रहता है। बताया कि आज धनवंतरी जयंती भी है लिहाजा मां के दरबार में आने वाले को रोग व्याधि से भी मुक्ति मिलती है। यह इकलौता मंदिर है जहां एक साथ मां अन्नपूर्णा, भू देवी और माता लक्ष्मी तीनों का विग्रह है। 

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