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Lok Sabha Election: पूर्वांचल की 3 लोकसभा सीटों पर 19 भूमिहार जीते, अकेले घोसी से 12 बार हुए विजयी
Wed, 20 Mar 2024 09:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Wed, 20 Mar 2024 09:20 PM IST
सार
Lok Sabha Election: कल्पनाथ राय सर्वाधिक चार बार घोसी सीट से सांसद चुने गए। हालांकि उनके निधन के बाद भूमिहार राजनीति दो दशक तक हाशिए पर रही। 2019 के चुनाव में बसपा के टिकट पर अतुल राय ने जीत दर्ज कर भूमिहार राजनीति को संजीवनी दी। वाराणसी से दो सांसद रघुनाथ सिंह और सत्यनारायण सिंह भूमिहार वर्ग से थे।
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लोकसभा चुनाव 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्वांचल की सियासत में भूमिहार बिरादरी की तीन सीटों पर जबर्दस्त पैठ है। इन तीन सीटों घोसी, गाजीपुर और वाराणसी में अब तक हुए चुनाव में 19 बार भूमिहार बिरादरी से जुड़े नेता सांसद चुने गए। बलिया, गाजीपुर, घोसी और वाराणसी सीट पर भूमिहार वोटर हार-जीत तय करते रहे हैं। अगर पूर्वांचल की 13 लोकसभा सीटों पर नजर डालें तो भूमिहार वोटरों की संख्या लगभग साढ़े छह लाख है।
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बलिया लोकसभा क्षेत्र में लगभग डेढ़ लाख भूमिहार मतदाता हैं, जबकि आजमगढ़ में एक लाख के करीब भूमिहार वोटर हैं। इसी तरह, वाराणसी और घोसी में भूमिहार मतदाताओं की संख्या 80 हजार के आस-पास है। गाजीपुर में 70 हजार भूमिहार वोटर हैं। अगर जीत के स्ट्राइक रेट की बात करें तो घोसी का औसत सबसे शानदार है। दलित बहुल इस सीट पर 17 में से 12 बार भूमिहार बिरादरी के नेता ही सांसद चुने गए हैं।
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घोसी सीट से 4 बार सांसद चुने गए कल्पनाथ राय
कल्पनाथ राय सर्वाधिक चार बार घोसी सीट से सांसद चुने गए। हालांकि उनके निधन के बाद भूमिहार राजनीति दो दशक तक हाशिए पर रही। 2019 के चुनाव में बसपा के टिकट पर अतुल राय ने जीत दर्ज कर भूमिहार राजनीति को संजीवनी दी। 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में गैर भूमिहार उमराव सिंह सांसद बने। लेकिन फिर 1962,1967, 1968, 1971, 1977, 1980, 1984, 1989, 1991, 1996 और 1998 के चुनाव में हर बार भूमिहार बिरादरी का ही दबदबा रहा।
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1962 और 1967 में इस सीट से भूमिहार नेता जयबहादुर सिंह विजयी हुए। 2009 में बलिया सीट से भाजपा के टिकट पर मनोज सिन्हा ने भाग्य आजमाया मगर तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि गाजीपुर सीट से उन्हें तीन बार जीत मिली।
डेढ़ लाख भूमिहार होने के बावजूद आज तक जीत नसीब नहीं हुई
वाराणसी से दो सांसद रघुनाथ सिंह और सत्यनारायण सिंह भूमिहार वर्ग से थे। भदोही, मिर्जापुर और चंदौली ऐसी लोकसभा सीट है जहां से इस बिरादरी का एक भी नेता आज तक नहीं जीता। बलिया में डेढ़ लाख वोटर होने के बावजूद भूमिहारों को आज तक जीत नसीब नहीं हुई है। आजमगढ़ के साथ भी ऐसा ही हुआ है। बाबू विश्राम राय इस सीट से तीन बार लड़े मगर जीत दर्ज नहीं कर सके।