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घरों में ही अदा करें अलविदा और ईद की नमाज
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वाराणसी। अलविदा और ईद की नमाज की घरों में ही अदा करें। प्रशासन के साथ ही मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी पूरे समुदाय से घरों के अंदर ही अलविदा और ईद की नमाज अदा करने की गुजारिश की है। धर्मगुरुओं ने अपील करते हुए कहा है कि लॉकडाउन और सामाजिक दूरी का सख्ती से पालन करें।
मुफ्ती ए बनारस अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि रमजान के दौरान जिस तरह लॉकडाउन का पालन किया गया है। उसी तरह से अलविदा और ईद की नमाज भी अदा करें। सभी मुसलमान सारे रोजे रखें और इफ्तार के समय कोरोना के खात्मे की दुआ करें। रोजेदार इस बात को सुनिश्चित करें कि जिन लोगों पर जकात फर्ज है वे गरीबों में जकात जरूर बांटें। तरावीह भी जरूर पढ़ें मगर मस्जिद में एक वक्त में पांच से अधिक लोग जमा ना हों।
मुफ्ती हारुन रशीद नक्शबंदी का कहना है कि रमजान के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही ना करें। यह इबादतों का महीना है और खुदा से कोरोना के खात्मे की इबादत करें। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए घरों में ही नमाज अदा करें। मस्जिदों में भीड़ लगाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
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शिया जामा मस्जिद के हाजी फरमान हैदर ने कहा कि चांद की तस्दीक होते ही रमजान-उल-मुबारक का आगाज हो जाएगा। सभी मुसलमानों से गुजारिश है कि वे ईद और अलविदा की नमाज में भी लॉकडाउन का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखें। इस वक्त जान बचाना सबसे बड़ी इबादत है। मस्जिदों में भी रमजान में पांच ही लोग रहेंगे।
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मुफ्ती ए बनारस अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि रमजान के दौरान जिस तरह लॉकडाउन का पालन किया गया है। उसी तरह से अलविदा और ईद की नमाज भी अदा करें। सभी मुसलमान सारे रोजे रखें और इफ्तार के समय कोरोना के खात्मे की दुआ करें। रोजेदार इस बात को सुनिश्चित करें कि जिन लोगों पर जकात फर्ज है वे गरीबों में जकात जरूर बांटें। तरावीह भी जरूर पढ़ें मगर मस्जिद में एक वक्त में पांच से अधिक लोग जमा ना हों।
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मुफ्ती हारुन रशीद नक्शबंदी का कहना है कि रमजान के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही ना करें। यह इबादतों का महीना है और खुदा से कोरोना के खात्मे की इबादत करें। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए घरों में ही नमाज अदा करें। मस्जिदों में भीड़ लगाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
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शिया जामा मस्जिद के हाजी फरमान हैदर ने कहा कि चांद की तस्दीक होते ही रमजान-उल-मुबारक का आगाज हो जाएगा। सभी मुसलमानों से गुजारिश है कि वे ईद और अलविदा की नमाज में भी लॉकडाउन का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखें। इस वक्त जान बचाना सबसे बड़ी इबादत है। मस्जिदों में भी रमजान में पांच ही लोग रहेंगे।