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साहित्य को मिला सम्मान, विद्वानों ने बढ़ाया काशी का मान

Wed, 03 Aug 2022 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 03 Aug 2022 01:09 AM IST
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Literature got respect, scholars raised the value of Kashi
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से पुरस्कार पाने वाले काशी के छह विद्वानों ने अपना नाम दर्ज कराकर मान बढ़ाया है। साहित्य भूषण से लेकर महादेवी वर्मा सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, पराड़कर सहित अन्य पुरस्कार मिले हैं। विद्वानों ने इसे हिंदी भाषा का सम्मान बताते हुए प्रचार-प्रसार में अपनी भागीदारी देने का संकल्प लिया।
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साहित्य सेवियों और जगत को यह सम्मान समर्पित करता हूं। बाबा विश्वनाथ की कृपा से ही यह सम्मान मिला है। इस तरह के सम्मान से साहित्य के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करते रहने की प्रेरणा मिली है। - डॉ. दयानिधि मिश्र, साहित्य भूषण सम्मान
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आठ मार्च को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के बाद अब हिंदी साहित्य संस्थान का सम्मान पाना गौरव की बात है। यह सम्मान काशी की साहित्य परंपरा का सम्मान है। इससे आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलती रहती है। - डॉ. नीरजा माधव, साहित्य भूषण सम्मान
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बाबू राव विष्णु पराड़कर के नाम से पुरस्कार मिलना सौभाग्य है। इससे बड़े गौरव की बात मेरे लिए और कोई नहीं हो सकती है। इस पुरस्कार से मुझे पत्रकारिता के क्षेत्र में और बेहतर प्रयास करने की प्रेरणा मिलेगी। - नरेंद्र नाथ मिश्र, बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार
कंथा महाकवि जयशंकर प्रसाद के जीवन और उनके युग पर लिखा वृहद उपन्यास है। इसके सृजन में कुल दो दशकों का समय लग गया। कंथा को मिला यह पुरस्कार उपन्यास सम्राट प्रेमचंद के नाम का है। यह संतोषप्रद है। - श्याम बिहारी श्यामल, प्रेमचंद पुरस्कार
भोजपुरी गांव में समाप्त हो रही है। यह हमारे पूर्वजों की थाती है। इसे संग्रह करके रखने की जरूरत है। भोजपुरी भाषा में काम करने पर यह जो पुरस्कार मिला है, उससे बड़ी अभिभूत हूं। - प्रो. चंपा सिंह, हिंदी विभाग, बीएचयू
अदम गोंडवी हिंदी गजल की जन चेतना के प्रबल पक्षधर रहे हैं। उनके नाम से जुड़े पुरस्कार पाना मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी है। यह सम्मान सावन में बाबा विश्वनाथ का अनुपम आशीर्वाद और प्रसाद है।- चंद्रभाल सुकुमार, अंदम गोंडवी पुरस्कार

राष्ट्रीय महत्व की संस्था दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के ऐतिहासिक अवदान को हिंदी साहित्य संस्थान ने सम्मानित किया है। उत्तर भारत से दक्षिण भारत की संस्था को मिला यह सम्मान हिंदी, साहित्यिक, सांस्कृतिक चेतना और भाषाई सामासिकता को और मजबूत करेगी। -प्रो. राममोहन पाठक, पूर्व कुलपति दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
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