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लाटभैरव की रामलीला: तीन फीट के तलवार से सूर्पणखा की कटी नाक, खर-दूषण भी मारे गए; चार इलाकों में जुलूस

Thu, 15 Oct 2026 07:07 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 15 Oct 2026 07:07 PM IST
सार

श्रीआदि रामलीला लाटभैरव की प्रख्यात नक्कटैया लीला बृहस्पतिवार को उल्लास के साथ संपन्न हुई। विशेश्वरगंज से निकला जुलूस अंबियांमंडी, हनुमान फाटक और लाटभैरव होते हुए सरैयां पहुंचा। यहां खर-दूषण वध और सीता हरण की लीला हुई। 50 से अधिक लाग-विमान और स्वांग आकर्षण बने। करीब 400 वर्ष पुराने बुढ़िया-बुढ़वा के मुखौटों के साथ सेल्फी लेने की होड़ रही।

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Latbhairav Ramlila Surpanakha nose severed sword Khara and Dushana also slain processions across four areas
वाराणसी में लाटभैरव की प्रसिद्ध रामलीला में उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीआदि रामलीला लाटभैरव की प्रख्यात नक्कटैया लीला बृहस्पतिवार को उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। नक्कटैया का जुलूस विशेश्वरगंज से उठकर अंबियांमंडी, हनुमान फाटक और लाटभैरव होते हुए सरैयां पहुंचा। यहां खर-दूषण वध के बाद सीता हरण की लीला का मंचन किया गया। जुलूस में शामिल लाग-विमानों और स्वांगों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े।

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जुलूस के आगे बाजे-गाजे के साथ सूर्पणखा और उसके पीछे खर-दूषण के पुतले चल रहे थे। हाथी, घोड़े और ऊंट भी जुलूस का हिस्सा बने। तलवार भांजते काली के स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहे। नक्कटैया जुलूस में 50 से अधिक लाग, विमान और स्वांग शामिल थे। इनमें नागनथैया, कृष्ण-सुदामा मिलन, भामा-रुक्मिणी, संभासुर वध, काली तांडव, ताड़का वध, गोवर्धन पूजा, महिषासुर मर्दिनी और अघोरियों के तांडव की झांकियों को लोगों ने सराहा।

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जुलूस में करीब 400 वर्ष पुराने बुढ़िया-बुढ़वा के चेहरे विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन प्राचीन मुखौटों के साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों में होड़ लगी रही। जुलूस मार्ग पर आकर्षक सजावट की गई थी। पूरे मेले के दौरान मार्गों पर भारी भीड़ रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाराणसी प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे।

हालांकि, लाटभैरव से सरैयां तक सड़क की खराब स्थिति के कारण जुलूस में शामिल लाग-विमानों को आगे ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खराब रास्ते के चलते कलाकारों और आयोजकों को परेशानी हुई। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और दर्शकों का उत्साह बना रहा और लोग विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित झांकियों को देखने के लिए जुटे रहे।

नक्कटैया जुलूस का संयोजन समिति के प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैया लाल यादव, उपाध्यक्ष एवं पार्षद मनोज यादव, व्यास पंडित दयाशंकर त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, निखिल त्रिपाठी, शिवम अग्रहरि, पार्षद जितेंद्र कुशवाहा, संतोष साहू और पंकज त्रिपाठी सहित अन्य लोगों ने किया। धार्मिक प्रसंगों, पारंपरिक स्वांगों और प्राचीन मुखौटों से सजे जुलूस ने काशी की रामलीला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।

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