फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Land in Mirzapur is still in the name of people settled in Pakistan

पाकिस्तान में बसे लोगों के नाम से आज भी मिर्जापुर में है जमीन

Mon, 01 Feb 2021 09:25 PM IST
हरि User अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: हरि User Updated Mon, 01 Feb 2021 09:25 PM IST
विज्ञापन
Land in Mirzapur is still in the name of people settled in Pakistan
पाकिस्तान से सटी भारतीय सीमा: (सांकेतिक तस्वीर)

देश छोड़ कर पाकिस्तान में बसे लोगों का भी नाम मिर्जापुर जिले के चुनार तहसील क्षेत्र के भुईलीखास की खतौनी में चल रहा है। भुइलीखास गांव की खतौनी की पड़ताल की गई तो उसमें तहसील प्रशासन की बड़ी खामियां उजागर हुईं। गाटा संख्या 603, 620  व 621 ख में पाकिस्तान में बस गए परिवार का नाम दर्ज है।

विज्ञापन

 
देश के बंटवारे के समय 1947 से 1950 के मध्य भुइलीखास गांव से सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम परिवार पाकिस्तान चले गए। इसी में से थे जमींदार शाह मुजी बुल्ला। इलाके में उनकी हुकूमत चलती थी। एक बड़े भूभाग पर उनका नाम दर्ज है। सन् 1947 में शाह मुजी बुल्ला के परिवार के लोग पाकिस्तान चले गए। शाह के पुत्र हसन, नन्हें, बदरे ने पाकिस्तान की नागरिकता ग्रहण कर ली। इसके बाद से परिवार का कोई सदस्य भारत नहीं लौटा। ऐसे में उनकी संपत्ति का मालिकाना हक भी किसी के पास नहीं गया। तब से खतौनी में उनका नाम चला आ रहा है। 

विज्ञापन

खतौनी में आज भी उनका नाम जिनका हो चुका है इंतकाल 

जहां एक तरफ शासन का सख्त फरमान है कि प्रत्येक गांव में अभियान चलाकर मृत व्यक्तियों के नाम खतौनी से हटाकर उसके स्थान पर उसके वारिस का नाम दर्ज किया जाए। वहीं मिर्जापुर के सदर तहसील क्षेत्र के देवरी ग्राम पंचायत में पूरे गांव में सैकड़ों नाम ऐसे हैं, जिनका इंतकाल हो चुका है। यही नहीं कुछ खातेदारों के तो दो से तीन पीढ़ियां भी गुजर चुकी हैं, लेकिन आज तक उनका नाम ही खतौनी में चला आ रहा है।

गांव निवासी विनोद कुमार सिंह का कहना है कि वर्ष 1974 में ग्राम देवरी में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई जो 48 वर्षों तक चली। आखिर चकबंदी आयुक्त ने जनवरी 2019 में पूरे गांव की चकबंदी प्रक्रिया ही निरस्त कर दी। इस दौरान कई खातेदारों की मृत्यु हो चुकी है। इन सब के बावजूद वरासत का मामला वैसा ही है। अब जब सभी पत्रावलियों को आनलाइन किया जा रहा, देवरी की खतौनी फीड करते समय 48 वर्ष पूर्व जो रिकार्ड था, उसी आधार पर नाम फीड कर दिया गया।

इससे 48 वर्ष पूर्व जो नाम थे, वही दर्ज हुए। उनकी संतानों के नाम आज भी नहीं चढ़ाए जा सके हैं। राजस्व अधिकारियों की ओर से कहा जा रहा है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान जो वरासत आदेश हुए थे उन आदेशों को फीड नहीं किया जाएगा। ऐसे में बाद की पीढ़ियां अपना नाम खतौनी में दर्ज कराने के लिए परेशान हैं। तहसील की ओर से वरासत के लिए 50 वर्ष पूर्व का मृत्यु प्रमाण पत्र व तमाम कागजात मांगे जा रहे हैं।

वरासत के चलते सरकारी योजनाओं से वंचित हैं ग्रामवासी

सदर तहसील क्षेत्र के देवरी गांव में वरासत न होने से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने समेत अन्य तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हैं। वहीं भारी संख्या में सैकड़ों खातेदारों का वरासत दर्ज करने की एक विकट समस्या राजस्व कर्मियों के लिए भी बनी हुई है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चकबंदी के दौरान जोत चकबंदी आकार पत्र 11 व जोत चकबंदी आकार पत्र 23 में निर्विवाद वरासत दर्ज हैं। निर्विवाद वरासत आदेशों को यदि तहसील सदर की वर्तमान खतौनी में फीड करा दिया जाए तो सभी समस्याओं का हल निकल सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed