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ज्ञान की मशाल बना महामना का दान दीपक

Thu, 05 May 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 05 May 2016 01:42 AM IST
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Lamp torch of knowledge to make a donation of high-minded
बीएचयू
भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय ने दान के दीपक से शिक्षा की जो अलख जगाई थी, सौ साल में वो मशाल बन गई है। बीते 13 फरवरी को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अपनी स्थापना के सौ साल पूरे कर दूसरे गौरवमयी सफर पर आगे बढ़े गया है। एक सदी के स्वर्णिम सफर के बाद आज काशी हिंदू विश्वविद्यालय एशिया के ख्यातिलब्ध शिक्षण संस्थान में शुमार है। दान से शुरू की गई इस गौरवमयी संस्थान की खासियत विद्यादान का अनवरत चलने वाला इतिहास है।
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यह पहला विश्वविद्यालय है, जिसने ग्लास टेक्नालॉजी, फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, माइनिंग, मेटलर्जी, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा की शुरुआत की। आयुर्वेद, संगीत और संस्कृत में भी उच्चस्तरीय शिक्षा को आगे बढ़ाने का श्रेय भी इसी विश्वविद्यालय को है। यही नहीं, ये देश का इकलौता विश्वविद्यालय हैं, जहां नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई होती है। यही वजह है कि इसे ‘सर्वविद्या की राजधानी’ की उपाधि मिली हुई है।
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‘कैपिटल ऑफ नॉलेज’ बीएचयू की तमाम और भी उपलब्धियां हैं। फिर चाहे वो ट्रॉमा सेंटर की सौगात हो, या फिर विज्ञान व प्रबंध शास्त्र संकाय को संस्थान का दर्जा मिला हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां टीचर्स एजूकेशन सेंटर के साथ कैंपस कनेक्ट की सौगात दी। लोक संस्कृति और कला के अध्ययन के लिए भारत अध्ययन केंद्र की स्थापना और नदियों के शोध के लिए मालवीय रिसर्च सेंटर फॉर गंगा, रिवर डेवलपमेंट एंड वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट की शुरुआत से बीएचयू ने व्यापक पैमाने पर समाज को कुछ खास देने में अपनी भूमिका को प्रबल किया है। राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में सोलर एनर्जी फार्म और ग्रीन एनर्जी सेंटर की शुरुआत करके बीएचयू ने वैश्विक समस्याओं का समाधान ढूंढने की अनूठी पहल की है। पिछले एक साल में बीएचयू की ग्लोबल ब्रांडिंग भी खूब हुई। क्योटो, टोक्यो, शेमाने के साथ ही अमेरिका, रूस, चीन, नार्वे, नेपाल जैसे देशों के साथ बीएचयू की भागीदारी बढ़ी। बीएचयू ने इस साल काशी को तीन पद्मश्री की भी सौगात दी है।
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