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लक्ष्मण को लगी शक्ति, राम की सेना हुई शोकाकुल
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बीर घातिनी छांड़िसि सांगी, तेज पुंज लछिमन उर लागी। मुरुछा भई शक्ति के लागे, तब चलि गयउ निकट भय त्यागे॥ मेघनाद ने लक्ष्मण पर वीर घातिनी शक्ति चलाई। वह तेजपूर्ण शक्ति लक्ष्मण की छाती में लगी। शक्ति लगने से उन्हें मूर्च्छा आ गई, तब मेघनाद भय छोड़कर उनके पास चला गया और लक्ष्मण को उठाने का प्रयास करने लगा लेकिन श्री शेष के स्वरूप लक्ष्मण नहीं उठे।
बृहस्पतिवार को श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला में चारों फाटक की लड़ाई और लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन हुआ। लंका पर वानर सेना ने हमला कर दिया और राक्षसी सेना विकल हो जाती है। मेघनाद को जब वानर सेना के हमले के बारे में पता चला तो वह युद्ध करने के लिए उतर पड़ा। वह राम और लक्ष्मण को ललकारता है और वानर सेना पर हमला कर देता है। वानर सेना में खलबली मच जाती है। सेना की हालत देखकर लक्ष्मण भगवान राम की आज्ञा लेकर युद्ध में उतरते हैं। बहुत भयानक युद्ध होता है और लक्ष्मण के बाणों से विकल होकर मेघनाद उन पर शक्ति का प्रहार करता है। युद्धभूमि में लक्ष्मण मूर्च्छित होकर गिर जाते हैं और राम की सेना में शोक व्याप्त हो जाता है। जामवंत सुषेण वैद्य के बारे में बताते हैं और हनुमान उनको लेकर आते हैं। सुषेण के कहने पर हनुमान हिमालय की ओर संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। देखा सैल न औषध चीन्हा, सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा... वह संजीवनी बूटी नहीं पहचानते हैं तो पूरा पहाड़ ही लेकर चल देते हैं। वहीं, चित्रकूट की रामलीला में अंगद विस्तार, चारों फाटक की लड़ाई, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण मेघनाद वध, सुलोचना सती की झांकी सजाई गई।
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बृहस्पतिवार को श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला में चारों फाटक की लड़ाई और लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन हुआ। लंका पर वानर सेना ने हमला कर दिया और राक्षसी सेना विकल हो जाती है। मेघनाद को जब वानर सेना के हमले के बारे में पता चला तो वह युद्ध करने के लिए उतर पड़ा। वह राम और लक्ष्मण को ललकारता है और वानर सेना पर हमला कर देता है। वानर सेना में खलबली मच जाती है। सेना की हालत देखकर लक्ष्मण भगवान राम की आज्ञा लेकर युद्ध में उतरते हैं। बहुत भयानक युद्ध होता है और लक्ष्मण के बाणों से विकल होकर मेघनाद उन पर शक्ति का प्रहार करता है। युद्धभूमि में लक्ष्मण मूर्च्छित होकर गिर जाते हैं और राम की सेना में शोक व्याप्त हो जाता है। जामवंत सुषेण वैद्य के बारे में बताते हैं और हनुमान उनको लेकर आते हैं। सुषेण के कहने पर हनुमान हिमालय की ओर संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। देखा सैल न औषध चीन्हा, सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा... वह संजीवनी बूटी नहीं पहचानते हैं तो पूरा पहाड़ ही लेकर चल देते हैं। वहीं, चित्रकूट की रामलीला में अंगद विस्तार, चारों फाटक की लड़ाई, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण मेघनाद वध, सुलोचना सती की झांकी सजाई गई।
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