मोबाइल पर मिलेगी लैब रिपोर्ट: अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार, मरीजों को सुविधा; समीक्षा
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तीन मंडलों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की समीक्षा हुई। अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया। ओपीडी में ऑनलाइन पंजीकरण और मोबाइल पर लैब रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। चिकित्सा संस्थानों को डिजिटल सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए 15 अक्तूबर तक का समय दिया गया।
विस्तार
वाराणसी सहित तीन मंडल के 10 जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। इसमें जहां ओपीडी में आने वाले मरीजों को पंजीकरण के लिए आभा आईडी अनिवार्य रुप से बनानी होगी, वहीं पैथालॉजी में जांच कराने के बाद मोबाइल पर रिपोर्ट भी मरीजों को देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
बुधवार को मंडल स्तरीय आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन(एबीडीएम) के सम्मेलन में शासन स्तर से सचिव स्वास्थ्य और मिशन निदेशक एबीडीएम रितु माहेश्वरी, साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने तीन मंडल के स्वास्थ्य अधिकारियों, अस्पताल संचालकों को 15 अक्तूबर तक डिजिटलीकरण का कार्य पूरा करने को कहा।
मंडल स्तरीय कार्यशाला में वाराणसी, आजमगढ़, मिर्जापुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य, इन मंडलों के तहत आने वाले जिलों (वाराणसी मंडल-वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली। आजमगढ़ मंडल-आजमगढ़, बलिया और मऊ के साथ ही मिर्जापुर मंडल में मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही) में स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
इसमें ऑनलाइन स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया कराने के मामले में तीनों मंडलों में शतप्रतिशत संतुष्टि रिपोर्ट न मिलने पर अधिकारियों ने चिंता जताई। सचिव स्वास्थ्य रितु माहेश्वरी ने अधिक से अधिक अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों को एबीडीएम से जोड़ने और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में सभी सीएमओ से काम करने को कहा। इसके लिए जिला स्तर पर भी समय-समय पर बैठक कर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करते रहने को कहा।
सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटलीकरण से न केवल मरीजों को भीड़भाड़ से छुटकारा मिलेगा, बल्कि एक बार डॉक्टर को दिखाने के बाद उनके स्वास्थ्य का पूरा डेटा भी एक जगह सुरक्षित रहेगा। मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने सचिव स्वास्थ्य सहित अन्य लोगों को पूरा भरोसा दिलाया कि मंडल में एबीडीएम के जो भी मानक है, उसको प्रभावी रूप से लागू करने का कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इससे पहले वाराणसी के सीएमओ डॉ.एनपी सिंह ने सभी अधिकारियों, अस्पतालों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला महिला अस्पताल की एसआईसी डॉ.मनीषा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन डॉ. मोहित सिंह ने किया।
कार्यक्रम में आईएमएस बीएचयू से प्रो.अंकुर सिंह, नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.अजीत सैगल , हेरिटेज मेडिकल कॉलेज से डॉ सिद्धार्थ राय, आईएमए अध्यक्ष डॉ अनुराग टंडन, महामना कैंसर संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आकाश, आईएमए जौनपुर से अध्यक्ष डॉ. सुधा के साथ ही डॉ. अतुल सिंह, डॉ. सौरभ प्रताप सिंह, केके राय, शुभम सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी, चिकित्सक मौजूद रहे।
एबीडीएम से मरीजों के साथ चिकित्सा संस्थानों को भी सहूलियत
साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एवं आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बीच बेहतर डिजिटल समन्वय के बारे में हर एक पहलु के बारे में बताया। कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एबीडीएम के डिजिटल सिस्टम के साथ समन्वय करने से केवल मरीज को ही लाभ नहीं होगा बल्कि चिकित्सा संस्थानों की सेवाओं को और सुगम और प्रभावी बनाया जा सकता है।
कार्यशाला में डिजिटलीकरण से जुड़े अलग-अलग पोर्टल और दस जिलों के डेटा के आधार पर समय-समय पर सुधार लाने की बात भी अधिकारियों से कही। डिजिटल मिशन के तहत प्रदेश के हर जिले में दो अस्पताल (एक सरकारी, एक निजी) को मॉडल बनाया जाएगा। कहा कि अगले दो महीने तक जिलेवार इसी तरह की कार्यशाला आयोजित की जाएंगी, जिससे कि आने वलो दिनों में डिजिटल मिशन को बढ़ावा मिल सके।
डिजिटल सेवा होने से क्या होगा लाभ
- ओपीडी में आने के बाद मरीजों का आभा आईडी बनाने से उनको पर्चा के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
- एक बार डॉक्टर को दिखाने के बाद क्या परामर्श मिला, क्या जांच लिखी गई, बीमारी क्या थी, इसका पूरा डेटा भी रहेगा।
- पैथालॉजी में खून जांच का सैंपल देने के बाद मोबाइल पर मरीजों को रिपोर्ट मिल जाएगी। इसके लिए उनको अगले दिन लैब का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
- आयुष्मान भारत योजना में डॉक्टर ने क्या इलाज किया, कितना खर्च आया, इन सबका काम आसान हो जाएगा।
- सरकारी, निजी अस्प्तालों को पूर्ण रुप से डिजिटल होने से मरीजों को घर से ही ओपीडी की बुकिंग करने की सुविधा मिलेगी।
- अस्पतालों में जो भी क्लीनिकल डेटा होगा, उसका सही तरीके डॉक्यूमेंटेशन होगा।
- आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों को चिन्हित कर कार्रवाई करना आसान होगी।