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सर्दियों में बरतें सावधानी: ठंड में लापरवाही से बढ़ रही ये बीमारी, हृदय रोग का भी खतरा; ऐसे रखें ख्याल

Thu, 14 Dec 2023 03:19 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 14 Dec 2023 03:19 PM IST
सार

ठंड से पहले 300 मरीजों वाली ओपीडी में औसतन 15 से 20 लकवा के मरीज आते थे, इस समय संख्या बढ़कर 80 से 100 पहुंच गई है। 

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Know causes and prevention measures of paralysis increasing in winter from expert doctors of BHU Hospital
विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की दी सलाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ठंड में लापरवाही से लकवा और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अचानक बीपी बढ़ने का भी खतरा रहता है। इससे दिमाग के नसों की धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में हर दिन 40 से 50 मरीज इस तरह की समस्या लेकर आ रहे हैं।

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आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में लकवा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि ठंड से मरीजों की संख्या बढ़ी है। ठंड से पहले 300 मरीजों वाली ओपीडी में औसतन 15 से 20 लकवा के मरीज आते थे, इस समय संख्या बढ़कर 80 से 100 पहुंच गई है। वेकअप स्ट्रोक यानी रात के समय सोते समय भी लकवा हो जा रहा है। इनकी उम्र 50 से 70 के बीच रहती है। इनको रात के समय शराब का सेवन न करने, ठंड से पूरा बचाव करने और रात का खाना जरूर खाने की सलाह दी जाती है।
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जागरूकता की कमी से बढ़ रही बीमारी
प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि लकवा, हार्ट अटैक जैसी बीमारी को लेकर जागरूकता के बाद भी बीमारी के प्रति लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं। विशेषकर ग्रामीण इलाके से आने वाले लोग इस बीमारी को लेकर पहले झाड़फूंक कराते हैं, जब मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती है, तब अस्पताल आते हैं।
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दस बेड का है अलग लकवा वार्ड
बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वार्ड में लकवा के मरीजों के इलाज के लिए दस बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। इसी पर लकवा के मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसके अलावा वार्ड में 38 बेड और 18 बेड वेंटीलेटर युक्त है। लकवा वार्ड के भरने के बाद मरीजों को अन्य बेड पर भर्ती किया जाता है।


लकवा की पहचान है फास्ट
प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि लकवा की पहचान फास्ट के माध्यम से की जा सकती है। इसमें एफ से फेस यानी चेहरा, ए से आर्म यानी बांह, एस से स्पीच यानी बोलना और टी से टेस्ट। इस फास्ट का अर्थ यह है कि एक तरफ का चेहरा और उसी तरफ का हाथ अगर कमजोर हो और मुंह से आवाज न निकल रही हो तो यहीं लकवा की सबसे बड़ी पहचान है।

ये हैं लकवा के लक्षण

  • अचानक सरदर्द, चिड़चिड़ापन होना।
  • एक साइड का हाथ और पैर कमजोर होना।
  • आवाज अचानक गायब हो जाना।
  • रह-रह कर मरीज का बेहोश हो जाना।
  • चेहरे का टेढ़ा होना।


ये बरतें सावधानी

  • शुगर, ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें।
  • नियमित व्यायाम करना चाहिए।
  • डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां जरूर लें।
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