UP: काशी, कबीर और विवादों के मठ-मंदिर, पढ़ें- 15 साल से चल रहे विवाद की पूरी कहानी
काशी, कबीर व मठ-मंदिरों के विवाद थम नहीं रहे हैं। 2010 में पहली बार जमीन बेचने पर विवाद शुरू हुआ था। लहरतारा में 2022 में जमीन का सट्टा करने पर हंगामा भी हुआ था। आइए जानते हैं विवादों से जुड़ी पूरी कहानी...
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श्रमसाधक कबीर के मठ में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विरासत के साथ ही संपत्ति का विवाद पिछले दो दशक से कबीरपंथ के मठों में बना हुआ है। कहीं जमीन के लिए तो कहीं गद्दी के लिए कबीरपंथी एक दूसरे के विरोधी बने हैं।
देश भर में कबीरचौरा मूलगादी मठ से जुड़ी सैकड़ों बीघा भूमि माफिया और साधुओं की मिलीभगत से विवादों में है। कबीरचौरा मूलगादी में जमीन, गद्दी और विरासत का विवाद 2010 में शुरू हुआ। लहरतारा मठ के महंत गोविंददास शास्त्री के अनुसार 2010 में महंत विवेकदास ने मठ से जुड़ी कुछ जमीन बेच दी। इस पर पूर्व महंत गंगाशरण शास्त्री ने नाराजगी जताई तो उनको षड़यंत्र के तहत जेल भिजवा दिया गया।
महंत विवेक दास ने 2022 में लहरतारा मठ से जुड़ी कुछ जमीनों का सट्टा कर दिया तो महंत गोविंद शास्त्री ने आपत्ति जताई तो उनको भी कई मामलों में फंसाकर जेल भेज दिया गया। महंत गोविंद शास्त्री ने बताया कि मूलगादी में कुछ साल पहले तक 70 से 80 साधु नियमित रहा करते थे, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद आज महज 10 लोग ही रह गए हैं।
500 से ज्यादा मठ हैं मूलगादी से जुड़ेलहरतारा तालाब पर नीरू और नीमा को मिला नन्हा बालक नीरू टीला पर पला, ज्ञानी बना और कबीर कहलाया। नीरू टीला आज कबीरचौरा मूलगादी मठ है। आचार्य लाल साहब ने मूलगादी मठ की देश भर में 365 शाखाएं स्थापित की थीं। उनमें से दो सौ मठों के पास संपत्तियां है। इनका संचालन मूलगादी पीठ ही करती है।
इसके अलावा पांच सौ से ज्यादा मठ हैं जो मूलगादी से जुड़े हैं। इसकी शाखाएं पाकिस्तान में भी हैं। 1989 में मूलगादी के महंत अमृत साहब का देहांत होने के बाद गंगाशरण शास्त्री महंत बने और विचारदास को उत्तराधिकारी बनाया। 1999 में महंत गंगाशरण शास्त्री ने विवेक दास को महंत बनाया। 2023 में महंत विवेक दास ने प्रमोद दास को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
औरंगजेब ने दी थी एक हजार बीघा जमीन
औरंगजेब ने संत कबीर की देह जगह मिले पुष्प से बनी मजार और समाधि के लिए गोरखपुर के सहजनवा में पांच-पांच सौ बीघा जमीन दी थी। मठ के स्वामित्व वाली समाधि के पास अब दो सौ बीघा भूमि और 100 बीघे का तालाब बचा है। काफी जमीन साधुओं ने बेची भी हैं। बिहार में पटना के सिकंदरपुर और नालंदा के बहादुरपुर में सिकंदर लोदी, समस्तीपुर के सतमलपुर में अकबर ने मठ को जमीन दी थी। आरा, सहरसा, गया, बलिया के करनई, सारनाथ, अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा और उसके समीप के डामौर, उड़ीसा में पुरी सहित तमाम स्थानों पर धर्मशालाएं, मठ और कृषि भूमि है।
लहरतारा मठ पर भी है विवाद
कबीर प्राकट्य स्थल लहरतारा के महंत गोविंद दास शास्त्री और कबीरचौरा मूलगादी के महंत विवेकदास में भी संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मठ को कब्जे से मुक्त किया गया। महंत गोविंद दास शास्त्री ने कहा कि जमीन पर भू-माफिया कब्जा करना चाहते हैं।
पूर्वांचल में 300 मठ और मंदिर में चल रहा विवाद
पूर्वांचल के मठ मंदिरों में गद्दी का विवाद कई पीढि़यों से चला आ रहा है। तीर्थ पुरोहितों और संत समाज के अनुसार पूर्वांचल में लगभग 300 मठ और मंदिर हैं, जहां गद्दी का विवाद चल रहा है। कुछ मामले कोर्ट में हैं तो कुछ संत समाज के पास भी लंबित हैं। इसे देखते हुए कई मंदिरों में पारी की व्यवस्था की गई है।