Varanasi News: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान बोले- नारी को अबला समझना हमारी भूल, वो तो शक्ति की मिसाल
वाराणसी पहुंचे केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान शनिवार को रुद्राक्ष कनवेंशन सेंटर में पाणिनी कन्या महाविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।
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नारी को अबला समझने वाले यह भूल जाते हैं नारी ही हैं, जिसमें ईश्वर ने हम सब को दुनिया में लाने की शक्ति दी है। और हम ही उसे अबला यानि की कमजोर समझते हैं। असल बात तो यह है कि नारी के समान शक्तिशाली इस दुनिया में कोई नहीं है। यह बातें वाराणसी पहुंचे केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कही। समारोह में उन्होंने 50 छात्राओं को उपाधि दी। कार्यक्रम के बाद ज्ञानवापी मामले में पत्रकारों के सवाल पर कहा कि हमें न्यायालय पर भरोसा रखना चाहिए।
सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में पाणिनी कन्या महाविद्यालय के दीक्षांत और स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केरल के राज्यपाल ने कहा कि अब समय आ गया है जब हम नारी के विकास की बात करना बंद करें। नारी अबला नहीं सबला है। हमें नारी नेतृत्व को स्वीकार्य करना ही होगा है।
जिस प्रकार किसी समान पर धूल जम जाती है तो उसे साफ करने की जरूरत होती है। उसी प्रकार हमें अपने आचार और विचारों में भी शुद्धता लानी होगी। प्रकृति ने केवल महिला को ऐसा बनाया है, जिसमें हर महीने उनकी आंतरिक सफाई भी हो जाती है। जबकि पुरुष बाहर से ही शुद्घ होता है।
शिक्षा का अर्थ सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं
केरल के राज्यपाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का अर्थ सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान अर्थ को प्राप्त करना है। राज्यपाल ने सभी छात्राओं को भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक बन सकारात्मक बदलाव लाने और अपनी संस्कृति के लिए कार्य कराने की प्रेरणा दी।
भारत की पहचान हमेशा से ज्ञान केंद्र के रूप में
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आगे कहा कि भारत की पहचान दुनिया में हमेशा से ज्ञान केंद्र के रूप में रही है। हमें भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व में जन-जन तक पहुंचाना होगा। इस कार्य में नारी की भूमिका सबसे अहम है। श्रीमद्भागवत में भी कहा गया है कि हमारा पतन उस दिन से शुरू हुआ, जब हमने ज्ञान को अपने अंदर कैद करना शुरू कर दिया।
जो ज्ञान को दूसरों के साथ नहीं बांटता वो सरस्वती का उपासक नहीं है। गुरुकुल में बेटियों के शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारी संस्कृति अपनी रक्षा के लिए शस्त्र उठाने के लिए प्रेरित करता है। यह बड़े गर्व की बात है कि इस गुरुकुल में छात्राओं को शस्त्र के साथ शास्त्र में भी पारंगत हो रही है।
पाणिनी कन्या महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर सभागार में वेदपाठी 50 छात्राओं द्वारा शंख वादन किया गया। महाविद्यालय की 50 छात्राओं को उपाधि पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं अतिथियों ने स्वर्ण जयंती स्मारिका का भी विमोचन किया।
काशी में स्वागत तो विरोध भी हुआ
केरल के राज्यपाल ने अपने संबोधन की शुरुआत काशी की आतिथ्य परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसी काशी में मेरा स्वागत हुआ तो कई साल पहले इसी शहर में मेरा काफी विरोध और हमला भी हो चुका है। तब पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बहुत नाराज हुए थे। हमला करने वाले खुद उनकी पार्टी के सदस्य थे। वो गाड़ी से निकले थे और मोर्चा संभाला था। कई बार बनारस आना हुआ है। । लेकिन आज का जो अनुभव है, बहुत अद्भुत है। जिस दिव्यता के साथ आज स्वागत हुआ है, वो पहली दफा हुआ है।