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Varanasi News: काशी के पहले अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर का निधन, 1962 में जापान में खेला था मैच
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- जापान में किया भारत का प्रतिनिधित्व, इसके बाद बन गए नसीम इंडियन
- बुधवार को दालमंडी से सूरजकुंड तक निकला जनाजा, हुए सुपुर्द-ए-खाक
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। वाराणसी के पहले अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर नसीम अहमद खान का बुधवार को निधन हो गया। 74 वर्षीय नसीम ने दालमंडी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका जनाजा दालमंडी से नई सड़क के सूरजकुंड कब्रिस्तान तक गया, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
नसीम अहमद खान नसीम इंडियन के नाम से प्रसिद्ध थे। ऐसा इसलिए, क्योंकि 1962 में यूथ इंडिया गेम खेलने जापान की राजधानी टोक्यो गए थे। वहां पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। काशी से फुटबॉल में अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले वो पहले खिलाड़ी थे। इसी के बाद उन्होंने अपने नाम में नसीम इंडियन जोड़ लिया। उनके बेटे नसीम अहमद भी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर हैं।
ईस्टर्न रेलवे को फुटबॉल चैंपियन बनाने वाले कैप्टन
नसीम अहमद खान ईस्टर्न रेलवे को फुटबॉल चैंपियन बनाने वाले कैप्टन थे। कई साल तक वे इस टीम के कैप्टन रहे। आजीवन ईस्टर्न रेलवे की ओर से ही फुटबॉल खेलते रहे। कालका एक्सप्रेस में टीटी के तौर पर भी नौकरी की। उनकी ट्रेन कालका से चलकर मुगलसराय तक आती थी।
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- बुधवार को दालमंडी से सूरजकुंड तक निकला जनाजा, हुए सुपुर्द-ए-खाक
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। वाराणसी के पहले अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर नसीम अहमद खान का बुधवार को निधन हो गया। 74 वर्षीय नसीम ने दालमंडी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका जनाजा दालमंडी से नई सड़क के सूरजकुंड कब्रिस्तान तक गया, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
नसीम अहमद खान नसीम इंडियन के नाम से प्रसिद्ध थे। ऐसा इसलिए, क्योंकि 1962 में यूथ इंडिया गेम खेलने जापान की राजधानी टोक्यो गए थे। वहां पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। काशी से फुटबॉल में अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले वो पहले खिलाड़ी थे। इसी के बाद उन्होंने अपने नाम में नसीम इंडियन जोड़ लिया। उनके बेटे नसीम अहमद भी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर हैं।
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ईस्टर्न रेलवे को फुटबॉल चैंपियन बनाने वाले कैप्टन
नसीम अहमद खान ईस्टर्न रेलवे को फुटबॉल चैंपियन बनाने वाले कैप्टन थे। कई साल तक वे इस टीम के कैप्टन रहे। आजीवन ईस्टर्न रेलवे की ओर से ही फुटबॉल खेलते रहे। कालका एक्सप्रेस में टीटी के तौर पर भी नौकरी की। उनकी ट्रेन कालका से चलकर मुगलसराय तक आती थी।
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