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काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत का अनशन: स्वास्थ्य जानने मंडलीय अस्पताल से डॉक्टरों की टीम पहुची महंत निवास

Sat, 30 Jan 2021 05:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 30 Jan 2021 05:02 PM IST
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Kashi Vishwanath mandir purva mahant on Fast : Mandaliya Hospital doctors team reached mahant Niwas
मंडलीय अस्पताल की डॉक्टरों की टीम पहुंची महंत आवास। - फोटो : अमर उजाला

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी अपनी चल प्रतिमाओं को लेकर पिछले पांच दिनों से आमरण अनसन पर बैठे हैं। आज उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा से डॉक्टरों की टीम उनके आवास पहुंची और उनके स्वास्थ्य को चेक किया।

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सीओ दशाश्वमेघ अवधेश पांडेय व इंस्पेक्टर चौक भी महंत आवास पर पहुंचे। औपचारिक बातचीत के दौरान उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

रजत प्रतिमाओं की वापसी के लिए अनशन
बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमाओं की वापसी की मांग को लेकर पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी पिछले पांच दिनों से अनशन पर हैं। उनकी सेहत तेजी से गिर रही है। अनशन के चौथे दिन शुक्रवार को उनके ब्लडप्रेशर और पल्स दोनों में उतार चढ़ाव बना रहा। उनके पारिवारिक चिकित्सक डॉ. एमके शर्मा के अनुसार लगातार अन्न-जल का त्याग करने के कारण शरीर में कमजोरी तेजी से बढ़ रही है।

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पहुंचे आईबी के एसपी, दिया आश्वासन
टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर हो रही गतिविधियों का जायजा लेने के लिए एलआईयू के अधिकारी दिन में चार बार चक्कर लगा रहे हैं। दशाश्वमेध पुलिस भी मामले पर नजर बनाए हुए है। आईबी के एसपी दिवाकर सिंह महंत का कुशल क्षेम जानने उनके आवास पर पहुंचे। साथ ही यह आश्वासन दिया गया उनकी बातों को अपनी रिपोर्ट के माध्यम से ऊपर तक पहुंचाएंगे।
 
शासन-प्रशासन ने नहीं लिया संज्ञान
डॉ. कुलपति तिवारी के बेटे वाचस्पति तिवारी ने कहा कि मेरे पिता की अवस्था दिन पर दिन खराब होती जा रही है लेकिन जिला प्रशासन ने नैतिक जिम्मेदारी का पालन करते हुए 48 घंटे बाद मेडिकल टीम भी जांच के लिए नहीं भेजी है। विश्वनाथ मंदिर के अधिकारी अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं। उनसे बार -बार लिखित आश्वासन मांगा जा रहा है लेकिन वे मौखिक आश्वासन की बात पर ही अड़े हुए हैं। उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि धर्मार्थ मंत्री रानीभवानी गली में ध्वस्त भवन को देखने पहुंचे लेकिन अनशनरत महंत से मिलना भी उन्होंने उचित नहीं समझा। 

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