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ज्ञानवापी कभी मंदिर था: ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के नेता ने अपने बयान से सबको चौंकाया, मुस्लिम समुदाय से की ये अपील

Sun, 08 May 2022 01:20 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 08 May 2022 01:20 PM IST
सार

ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के प्रदेश प्रवक्ता शशी प्रताप सिंह ने मुस्लिम समाज से ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष को सौंप देने की अपील की है। 

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काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी परिक्षेत्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी परिसर के सर्वे को लेकर वाराणसी के साथ-साथ देश का माहौल गर्म है। मामले में अभी तक किसी राजनीतिक दल की ओर से कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया था। लेकिन आज सुबह समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शशी प्रताप सिंह ने एक बयान जारी कर चौंका दिया। उन्होंने मुस्लिम समाज से ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष को सौंप देने की अपील की है। 

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ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के नेता शशी प्रताप सिंह ने बयान जारी कर बताया कि बाबा विश्वनाथ मंदिर के बगल में बना हुआ ज्ञानवापी मस्जिद वास्तव में कभी मंदिर था। इस मस्जिद को ध्यान से देखें तो यह साफ दिखाई देता है कि किसी जमाने में मंदिर का ऊपरी हिस्सा को तोड़कर मस्जिद का ढांचा बनाया गया है।

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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप  की अपील
इस मंदिर के बारे में पूर्वजों का कहना है कि मंदिर के अंदर श्रृंगार गौरी माता की मूर्ति थी। शायद आज भी ज्ञानवापी में वह मूर्ति स्थापित है। बाहरी दीवार देखेने से तो शुद्ध रूप से वह मंदिर का ही डिजाइन दिखाई देता है। शशिप्रताप सिंह ने इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील की।

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सुभासपा के प्रदेश प्रवक्ता शशि प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला

कहा कि हिंदुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए मां श्रृंगार गौरी के मंदिर को हिंदुओं के हाथ में देने की प्रक्रिया शुरू करें। जहां तक मुसलमान भाइयों की बात है तो बनारस जनपद में अनगिनत मस्जिदें हैं। ज्ञानवापी मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्ष को कहीं और प्रदेश सरकार को जमीन देनी चाहिए। बनारस पूरी दुनिया में गंगा-जमुनी तहजीब, राम-रहीम सद्भावना और भाईचारा के लिए प्रसिद्ध है। दोनों समाज की आस्था को ध्यान में रखते हुए कोर्ट सही फैसला करें। 

मुस्लिम भाइयों को जिद छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद के प्रांगण को हिंदू भाइयों को दे देना चाहिए। जिससे बाबा के दरबार को और भी व्यवस्थित और भव्य बनाया जा सके। कोर्ट के आदेश को मानना चाहिए। इसमें राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

विरोध पर रुका ज्ञानवापी में सर्वे

ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित दर्शन पूजन को लेकर वाराणसी के सिविल जज के आदेश पर सर्वे का कार्य कराया जा रहा है। लेकिन मुस्लिम पक्ष के लोग इस सर्वे का लगातार विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को गहमागहमी के बीच पौने चार घंटे की कार्रवाई हो सकी।

वहीं शनिवार को मुस्लिम पक्ष के विरोध, बहिष्कार और हंगामे के बीच शनिवार को दूसरे दिन ज्ञानवापी परिसर में वीडियोग्राफी और सर्वे का काम रोकना पड़ा। परिसर पहुंचे अधिवक्ता आयुक्त और सर्वे टीम के अन्य सदस्यों को परिसर स्थित मस्जिद में प्रवेश नहीं करने दिया गया। टीम बीच में ही काम रोककर बाहर आ गई। यह कार्रवाई 9 मई तक के लिए टाली गई है। 

अधिवक्ता आयुक्त को बदलने की मांग, मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई कल

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अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के पक्ष के वकीलों ने दी अर्जी - फोटो : अमर उजाला

अधिवक्ता आयुक्त को बदलने की मांग को लेकर मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी) की ओर से शनिवार को अदालत में अर्जी दायर की गई। इस पर सुनवाई करते हुए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने वादी पक्ष और अधिवक्ता आयुक्त से आपत्ति मांगी है। अदालत ने कमेटी की अर्जी पर अगली सुनवाई के लिए 9 मई की तिथि तय की।

वादी पक्ष के पैरोकार सोहनलाल आर्य के मुताबिक कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। सर्वे के लिए हमें वहां तक पहुंचने ही नहीं दिया गया। मुस्लिम पक्ष के लोग परिसर के अंदर मस्जिद के दरवाजे पर आकर खड़े हो गए। इस वजह से सर्वे का काम रोक दिया गया।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष के वकील एखलाक अहमद ने कहा कि हमारी आपत्ति पर 9 मई को कोर्ट में सुनवाई होगी। इसलिए फिलहाल हम सर्वे में शामिल नहीं हो रहे हैं। अधिवक्ता आयुक्त को हमने इसकी जानकारी दे दी है। एक पक्ष के शामिल न होने के कारण सर्वे रोका गया।

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