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काशी विश्वनाथ -ज्ञानवापी परिसर मामला: दो साल पहले मिला था जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव, पांच महीने पहले बनी सहमति

Sun, 25 Jul 2021 06:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 25 Jul 2021 06:30 PM IST
सार

काशी विश्वनाथ धाम के आकार लेने के साथ ही जमीन हस्तांतरण की पहल शुरू हो गई थी। मुस्लिम समाज के धर्मगुरु और सुन्नी वक्फ बोर्ड की अनुमति के बाद हस्तांतरण हुआ।

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Kashi Vishwanath-Gyanvapi campus case: Two years ago proposal for transfer of land was received
ज्ञानवापी मस्जिद, काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के आकार लेने के साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की जमीन के हस्तांतरण की पहल शुरू हो गई थी। मंदिर प्रशासन से प्रस्ताव मिलने के बाद भी मुस्लिम धर्मगुरुओं, बुद्धिजीवियों और वक्फ बोर्ड की सहमति के बिना मामला आगे नहीं बढ़ सका था।

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मंदिर को जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया और सहमति बनाने में दो साल लग गए। सुन्नी वक्फ बोर्ड की यह 1700 वर्ग फीट जमीन हस्तांतरित होने के बाद अब श्री काशी विश्वनाथ धाम में शामिल हो गई है। इसके बदले में वक्फ बोर्ड को एक हजार वर्ग फीट जमीन दी गई है।
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अंजुमन इंतजामिया कमेटी के सचिव सईद यासीन ने कहा कि यह मसला एक दिन में हल नहीं हुआ है। दो साल पहले जब श्री काशी विश्वनाथ धाम का नक्शा तैयार हुआ था तो इसमें  वक्फ बोर्ड की जमीन पर ही यहां कंट्रोल रूम बना था। कॉरिडोर की डिजाइन में इस स्थान पर अब सुरक्षा टावर बनना है। ऐसे में जमीन की जरूरत पर मंदिर प्रशासन ने बात की थी।

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सुन्नी वक्फ बोर्ड की जमीन होने के कारण इस पर बोर्ड के लोगों से बात की गई। हमने लोगों से फतवा मांगा, शहर के मानिंद लोगों की भी राय ली। दोनों बातें हमारे पक्ष में रहीं। इस मामले में धर्मगुरुओं की भी राय ली गई तो उन्होंने भी जमीन विनिमय करने की सलाह दी। दो साल से बात चल रही थी।

लगभग पांच महीने पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड से भी इसकी अनुमति मिल गई थी। इसके बाद शासन से मंजूरी आने में समय लग गया। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आठ जुलाई को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट हो गया। वैसे यह जमीन मस्जिद का हिस्सा नहीं है। यह वक्फ बोर्ड की जमीन है और इसका मस्जिद से कोई ताल्लुक नहीं है।

श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने 17 सौ वर्ग फीट जमीन दी है। वहीं बदले में कमेटी को एक हजार वर्ग फीट जमीन बांसफाटक के पास मिली है। सचिव ने बताया कि इस जमीन पर कामर्शियल कांपलेक्स का निर्माण किया जाएगा।

जिला प्रशासन को लीज पर दी थी जमीन
1993 में इस जमीन को लीज पर जिला प्रशासन को दिया गया था कि पुलिस कंट्रोल रूम बना लिया जाए, जिससे कि मंदिर और मस्जिद की हिफाजत हो सके। काशी विश्वनाथ धाम का दायरा भी बढ़ा है तो सुरक्षा का बड़ा इंतजाम किया जा रहा है। वहीं कॉरिडोर में जाने के लिए रास्ता भी तंग पड़ रहा था। दो साल पहले मंदिर प्रशासन ने जमीन के विनिमय करने का प्रस्ताव रखा था।

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