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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kashi Vishwanath: 12 hundred forest dwellers from 1828 villages reached Baba Dham for the first time

Kashi Vishwanath: 1828 गांवों के 12 सौ वनवासी पहली बार पहुंचे बाबा धाम, पैजन व घुंघरू की रुनझुन से गूंजा परिसर

Mon, 30 Oct 2023 01:56 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Mon, 30 Oct 2023 01:56 PM IST
सार

रविवार को काशी विश्वनाथ धाम निर्माण के बाद पहली बार वनवासी और गिरिवासी समाज के लोगों ने सुगम दर्शन किए। मंदिर प्रशासन की ओर से चौक द्वार पर फूल बरसाकर सभी का स्वागत किया गया।

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Kashi Vishwanath: 12 hundred forest dwellers from 1828 villages reached Baba Dham for the first time
बनवासी और गिरिवासी समुदाय के लोग दर्शन करने पहुचें काशी विश्वनाथ मंदिर । - फोटो : संवाद

विस्तार

काशी विश्वनाथ धाम में भारत की विविधता एकाकार हुई। मानर की धुन, पैजन और घुंघरू की रुनझुन सुनकर हर कोई एक पल के लिए ठिठक गया। वनवासी समुदाय के संगीत की धुनों की प्रस्तुतियां हर किसी को बरबस ही अपनी तरफ खींच रही थीं। 1828 गांवों के 12 सौ वनवासियों ने पहली बार बाबा के भव्य धाम में हाजिरी लगाई। गंगा द्वार से धाम चौक तक हुए भव्य स्वागत से सभी अभिभूत थे। पूरा प्रांगण हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज रहा था।

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रविवार को काशी विश्वनाथ धाम निर्माण के बाद पहली बार वनवासी और गिरिवासी समाज के लोगों ने सुगम दर्शन किए। मंदिर प्रशासन की ओर से चौक द्वार पर फूल बरसाकर सभी का स्वागत किया गया। मंदिर परिसर में वनवासी समाज के लोगों ने अपने परंपरा एवं विधि का निर्वाह करते हुए वाद्ययंत्रों की ध्वनि से मंदिर में प्रवेश किया। उन्होंने आदिवासियों की संस्कृति पर मंडरा रहे खतरे को दूर करने के लिए प्रार्थना की।

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जनजातीय सुरक्षा मंच के निर्देशन में पहुंचे वनवासियों को एक-एक करके बाबा विश्वनाथ के मंदिर में सुगम दर्शन कराया गया। मंच के आनंद और प्रदेश महामंत्री देव नारायण खरवाल ने कहा कि हम सभी ने बाबा के धाम में दर्शन पूजन कर बाबा से प्रार्थना की है कि हमारे समाज के लोगों को बाबा सद्बुद्धि दें। उन्होंने कहा कि हम सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से सरकार से मांग करते हैं कि मतांतरित, धर्मांतरित तथा धर्म संस्कृति परंपरा का पालने करने वालों को जनजातीय सूची से बाहर कर जनजातीय समाज के साथ न्याय किया जाए। इस दौरान धाम के चौक क्षेत्र में विभिन्न कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

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