काशी विद्यापीठ ने छात्रों को दी राहत, विरोध-प्रदर्शन के बाद लिया निर्णय
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन ने छात्रों को बड़ी राहत दी है। स्नातक के बढ़े हुए परीक्षा शुल्क के बाद अब व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का शुल्क भी वापस ले लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले से वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र के करीब चार लाख से अधिक परीक्षार्थियों को राहत मिलेगी। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य ने शुल्क वृद्धि वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की ओर से ओएमआर शीट से परीक्षा कराने और फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्रों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा था। हरिश्चंद्र महाविद्यालय में छात्रसंघ पदाधिकारी पिछले 24 घंटे से धरने पर बैठे थे। वहीं विश्वविद्यालय में छात्रनेताओं ने कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा शुल्क बढ़ोत्तरी को वापस लेने का अल्टीमेटम दिया था। छात्रों की मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बढ़ी हुई परीक्षा फीस वापस ले ली है।
शुल्क वृद्धि को लेकर स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने गत 16 जनवरी को परिसर में जमकर हंगामा किया था। यही नहीं निजी कॉलेज शुल्क वृद्धि के विरोध में न्यायालय की शरण में चले गए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर विद्यापीठ की वित्त समिति ने मार्च में स्नातक की वार्षिक परीक्षा की बढ़ी हुई परीक्षा शुल्क वापस ले लिया था। उस समय व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के शुल्क वृद्धि को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका था। हाल में एक सप्ताह से छात्र स्नातकोत्तर व व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी शुल्क वृद्धि वापस करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाए हुए थे।
नया परीक्षा शुल्क इस प्रकार
- 1250 स्नातक
- 1500 स्नातकोत्तर
- 875 बीएड, एलएलबी, बीपीएड
- 2000 एमएड, एलएलएम व एमपीएड
27 घंटे बाद छात्रों का धरना हुआ समाप्त
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शुल्क वापसी का आदेश जारी होते ही हरिश्चंद्र महाविद्यालय में पिछले 27 घंटे से धरने पर बैठे छात्रसंघ पदाधिकारियों का धरना भी समाप्त हो गया। काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ अध्यक्ष संदीप यादव और प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने धरना दे रहे छात्रनेताओं का अनशन जूस पिलाकर समाप्त कराया।