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काशी उत्सव की दूसरी संध्या: मैथिली ठाकुर के सुरों पर झूमे काशीवासी, 'रुद्राक्ष' में बिखरे होली के रंग

Wed, 17 Nov 2021 11:41 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 17 Nov 2021 11:41 PM IST
सार

 काशी उत्सव की दूसरी संध्या में  लोकगायिका मैथिली ने खेले मशाने में होरी दिगंबर...की प्रस्तुति से रुद्राक्ष में होली के रंग बिखेर दिए। काशीवासी भी मैथिली की आवाज में कार्तिका मास में होली के गीत सुनकर आनंदित हुए। 

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Kashi Utsav 2021 second eve varanasi people  danced on songs of Maithili Thakur scattered  colors of Holi in Rudraksh convention centre
काशी उत्सव की दूसरी संध्या में मैथिली ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में आयोजित काशी उत्सव की दूसरी संध्या कबीर को समर्पित रही। सूफी गीत, कबीर की साखी और लोकगीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्मश्री डॉ. भारती बंधु, कलापिनी कोमकली और मैथिली ठाकुर की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दर्शकों के अंतर्मन में कबीर की बानी और निर्गुण निराकार ब्रह्म के स्वरूप को साकार करती रही।

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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में लोकगायिका मैथिली ने खेले मशाने में होरी दिगंबर...की प्रस्तुति से रुद्राक्ष में होली के रंग बिखेर दिए। काशीवासी भी मैथिली की आवाज में कार्तिका मास में होली के गीत सुनकर आनंदित हुए। 
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दमा दम मस्त कलंदर...
संगीत क्रम को आगे बढ़ाते हुए मैथिली ने छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाई के..., दमा दम मस्त कलंदर...के बाद पारंपरिक सोहर जुग जुग जियस ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो...सुनाया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मैथिली की अंतिम प्रस्तुति देखो राजा बने महाराज, आज राम राजा बने...रही। 

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सूफी रंगों में रंग गया माहौल

Kashi Utsav 2021 second eve varanasi people  danced on songs of Maithili Thakur scattered  colors of Holi in Rudraksh convention centre
पद्मश्री डॉ. भारती बंधु - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले बुधवार शाम पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने मोरे नैना में राम रंग छाय रहा हो...से शुरुआत की तो पूरा माहौल सूफी रंगों में रंग गया। झूठी दुआएं भेजी, झूठे सलाम लिखे, मैंने उनकी तरफ से खत अपने नाम लिखे...के साथ सूफी संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं।

इसके बाद उन्होंने सूफी शेर रखा है दिल को जख्मों से सजाकर, तमाशा देखिए तशरीफ लाकर। लगा है दिल तेरी चौखट पे आकर यहीं बैठेंगे हम धुनी रमा कर....। इसके बाद उन्होंने जरा धीरे-धीरे, जरा हौले-हौले, जरा धीरे गाड़ी हांको, मोरे राम... की प्रस्तुति दी। 

डॉ. बंधु ने समापन के दौरान कबीर की उलटबांसी की तरह ही गीत सबसे पहले हम जन्मे जी, पाछे बड़ा भाई। धूमधाम से पिताजी जन्मे, पाछे जननी माई...अंडा था जब बोलता था, बच्चा बोलत नाही... की सूफियाना प्रस्तुति दी। डॉ. भारती ने कहा कि पूरी दुनिया में खंगाल लो साहब यह अपवाद केवल भारत में ही हो सकता है। उल्टी ही चाल चलते है दीवान गान ए इश्क, आंखों को बंद करते हैं दीदार के लिए...।

Kashi Utsav 2021 second eve varanasi people  danced on songs of Maithili Thakur scattered  colors of Holi in Rudraksh convention centre
काशी उत्सव की दूसरी संध्या - फोटो : अमर उजाला
कलापिनी कोमकली और भुवनेश कोमकली ने तुलसीदास के विनय पत्रिका पर आधारित प्रस्तुतियां सुनाई और सविस्तार उनका वर्णन किया। इसके बाद मंच संभाला लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने। मैथिली ने अपनी शुरूआत कबीर खड़ा बाजार में, मांगत सबकी खैर। ना किसी से दोस्ती ना किसी से बैर....से की।
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