काशी-तमिल संगमम: मेहमानों ने देखा प्राचीन ग्रंथ, मॉडर्न 3डी प्रिंटर का संगम; दुर्लभ पांडुलिपियां ने किया हैरान
डेलीगेट्स ने भारत कला भवन में पेंटिंग, मूर्तिकला और मालवीय गैलरी से अपने एकेडमिक दौरे को शुरू किया। आईआईटी बीएचयू में तमिल पहुंचे डेलीगेट्स ने अनुसंधान, नवाचार, खेल संरचनाओं और अत्याधुनिक लैब का विजिट किया।
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Kashi Tamil Sangamam 2025 : बीएचयू पहुंचे काशी-तमिल संगमम 3.0 के 205 डेलीगेट्स ने प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक तकनीक का संगम देखा। एकेडमिक कार्यक्रम में बीएचयू और आईआईटी पहुंचे डेलीगेट्स ने 700 साल पुराने लिखे ग्रंथ और कई 3डी प्रिंटर देखे। सेंट्रल लाइब्रेरी में सहेजी गईं 14वीं शताब्दी तक की पुरानी 500 पांडुलिपियों को देख डेलीगेट्स ने हैरानी जताई।
इस काल की 12 दुर्लभ पांडुलिपियों में स्कंद पुराण, शिव रहस्य, केदार महात्म्य, विवेक चूड़ामणि, राम गीता, रुक्मिणी हरण, राधा माधव संवाद और वैदिकाचार्य निर्णय का अवलोकन किया। वहीं, आईआईटी बीएचयू के सेंट्रल इंस्ट्रूमेंट फैसिलिटी सेंटर और प्रिसिजन इंजीनियरिंग हब में छह तरह के 3डी प्रिंटर की तकनीक के बारे में जानकारियां लीं।
मेटल 3डी, कंपोसाइट, कलर, अल्टी मेकर, स्मार्ट 3डी प्रिंटर से तैयार हो रहे उत्पादों और रिसर्च के बारे में जाना। एकेडमिक सत्र में नई शिक्षा नीति, मातृभाषा, संगम साहित्य और विकसित भारत को लेकर मंथन हुआ। डेलिगेशन में तंजावुर विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और भारती दास कॉलेज के छात्र शामिल थे। श्रीनिवास देशपांडेय स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स, सेंट्रल इंस्ट्रूमेंट फैसिलिटी सेंटर और प्रिसिजन इंजीनियरिंग हब भी गए। यहां हो रहे शोध को समझा।
दूसरा दल आया, प्रस्तुतियां हुईं शानदार
काशी तमिल संगमम में हिस्सा लेने के लिए तमिलनाडु से दूसरा दल भी रविवार को स्पेशल ट्रेन से बनारस स्टेशन पहुंचा। यहां अफसरों ने सभी का स्वागत किया। इसके बाद सभी नमो घाट पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए।
डीएम एस राजलिंगम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे लोगों को अंगवस्त्रम और मोमेंटो देकर उनका स्वागत किया। डीएम ने तमिल भाषा में कार्यक्रम को संबोधित भी किया। वहीं, छात्र-छात्राओं के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई। विजेताओं को सम्मानित किया गया।
इसमें कस्तूरबा गांधी इंटर काॅलेज, अर्दली बाजार, संत अतुलानंद काॅन्वेंट स्कूल, एनी बेसेंट पब्लिक स्कूल और कंपोजिट विद्यालय आदमपुर के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। नमो घाट पर ही ऋषि अगस्त्य के जीवन और कार्यों के बारे में सचित्र वर्णन करती हुई प्रदर्शनी लगाई गई। तमिलनाडु के अन्य महान ऋषि, सामाजिक सुधारक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, कवियों के बारे में छात्रों को बताया गया।
73 नए कॉलेजों, तीन नए विवि की स्थापना
पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में हुए शैक्षणिक सत्र में वाराणसी की शिक्षिका डॉ. रचना शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किए जा रहे हैं। योजनाओं से राज्य में शिक्षा क्षेत्र को नई रफ्तार मिल रही है। इनमें 73 नए कॉलेजों, 3 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना और उच्च शिक्षण प्रोत्साहन निधि प्रमुख हैं।
कलाम-भारती ने देश को एक सूत्र में पिरोया
प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों के बारे में बताया। कवि सुब्रह्मणयम भारती, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम समेत तमिलनाडु के कई महान व्यक्तियों के योगदान की चर्चा की। कहा, उनके कार्य ने देश को एक सूत्र में पिरोया।
आईआईटी बीएचयू के प्रो. आरके मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा में शिक्षा देने को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। आईआईटी बीएचयू के डॉ. एस अरुल ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना, आर्थिक विकास और गुड गवर्नेंस को लेकर किए जा रहे रिसर्च को बताया।