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कब तक नरक भुगतेगी काशी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 20 May 2016 02:13 AM IST
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चौकाघाट स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर जाने वाला नाला जो सिल्ट के कारण आधे से ज्यादा पट चुका है।
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लगता है कि शहर की सीवेज और स्ट्राम ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाने के काम में सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। सीवेज और जलभराव की समस्या से छुटकारा दिलाने वाली इस योजना को वर्ष 2013 में ही पूरा कर लिया जाना था पर नौकरशाही की कछुआ चाल से यह योजना कब खत्म होगी कुछ कहा नहीं जा सकता। समय से कार्य खत्म न होने के कारण इस योजना पर करीब 100 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। आखिरकार कब तक नकर भुगतेगी काशी?
जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन मिशन (जेएनएनयूआरएम) और जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (जायका) के तहत पूरे शहर में 170 किमी सीवेज और 67 किमी स्टार्म ड्रेनेज वाटर पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जलनिगम की मानें तो सीवेज पाइप लाइन का काम अंतिम चरण में है, उसे जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जबकि स्टार्म ड्रेनेज वाटर पाइप लाइन का काम पूरा हो चुका है। इस पर जल निगम 793 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। कच्छप गति से काम होने के कारण जिसे दो साल पहले पूरा हो जाना चाहिए था वह अब तक अधर में लटका हुआ है।
सीवेज की समस्या की एक बड़ी वजह और भी है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का न होना। काफी मशक्कत के बाद गोइठहां में 140 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माण शुरू हुआ। वहीं दीनापुर एसटीपी का विस्तार भी अब शुरू हो चुका है। दोनों कार्य अगले साल मार्च में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सीवेज पाइप लाइन और स्टार्म ड्रेनेज वाटर की पाइप का काम पूरा हो भी हो गया तो इसका लाभ इस बारिश में शहरियों को मिलने वाला नहीं है। नतीजतन, बरसात में उफनाते सीवर और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। बता दें कि सीवर और ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाने की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। 2013 तक यह कार्य पूरा कर लिया जाना था लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है।
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जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन मिशन (जेएनएनयूआरएम) और जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (जायका) के तहत पूरे शहर में 170 किमी सीवेज और 67 किमी स्टार्म ड्रेनेज वाटर पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जलनिगम की मानें तो सीवेज पाइप लाइन का काम अंतिम चरण में है, उसे जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जबकि स्टार्म ड्रेनेज वाटर पाइप लाइन का काम पूरा हो चुका है। इस पर जल निगम 793 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। कच्छप गति से काम होने के कारण जिसे दो साल पहले पूरा हो जाना चाहिए था वह अब तक अधर में लटका हुआ है।
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सीवेज की समस्या की एक बड़ी वजह और भी है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का न होना। काफी मशक्कत के बाद गोइठहां में 140 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माण शुरू हुआ। वहीं दीनापुर एसटीपी का विस्तार भी अब शुरू हो चुका है। दोनों कार्य अगले साल मार्च में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सीवेज पाइप लाइन और स्टार्म ड्रेनेज वाटर की पाइप का काम पूरा हो भी हो गया तो इसका लाभ इस बारिश में शहरियों को मिलने वाला नहीं है। नतीजतन, बरसात में उफनाते सीवर और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। बता दें कि सीवर और ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाने की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। 2013 तक यह कार्य पूरा कर लिया जाना था लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है।
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