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काशी सूक्ष्म शक्ति बढ़ाएगा सब्जियों की पैदावार
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वाराणसी। पूर्वांचल में सब्जियों की खेती किसान अब कम लागत में सब्जियों का अधिक उत्पादन कर सकेंगे। इसमें भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में तैयार काशी सूक्ष्म शक्ति (माइक्रो न्यूट्रीयंस) तरल उर्वरक मददगार साबित होगा। संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में इस पर सफलता मिलने के बाद अब इसे दिल्ली में कृषि मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजने की तैयारी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ेगा।
शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. तुषार कांति बेहेरा के निर्देशन में डॉ. राज बहादुर यादव और उनकी टीम ने शोध कर नया तरल उर्वरक तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि यह मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में कारगर है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजबहादुर यादव ने बताया कि इस तरल उर्वरक को कॉपर, आयरन, जिंक, मैगनीज, बोरान, मालीबेटनम को मिलाकर बनाया गया है। इन सभी का मिश्रण बनाकर सब्जी के फसल के अनुरूप किया गया है। इसके बाद इसमें देखा गया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर हो जा रही है। पौधे की वृद्धि और उपज में भी अच्छा सुधार हुआ है।
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तीन साल में पूरा हुआ शोध
वैज्ञानिक डॉ. राजबहादुर यादव बताते हैं कि उन्होंने सब्जियों की खेती के लिए इस तरल उर्वरक बनाने का शोध 2018 में शुरू किया था और 2021 में शोध पूरा हुआ है। इसमें उनके साथ डॉ. जगदीश सिंह, डॉ. हरेकृष्णा, डॉ. राजीव कुमार भी शामिल रहे। बताया कि जो मिश्रण तैयार किया गया है, उसका फिलहाल 100 ग्राम का पैकेट तैयार कराया गया है। किसानों को इसकी जानकारी भी दी जा रही है। मिश्रण को घोल बनाकर छिड़काव किया जाता है।
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बीज की रोपाई के 30 दिन बाद छिड़काव
सब्जियों में फूलगोभी, बंद गोभी, टमाटर, भिंडी एवं लोबिया के बीज की बुवाई के 30 दिन बाद इस मिश्रण का छिड़काव पौधे पर किया जाता है। शोध में यह देखा गया है कि छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर करने पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर होती है।
तरल उर्वरक के प्रयोग के लिए शोध में सफलता के बाद कद्दू वर्गीय सब्जियों पर भी शोध शुरू कर दिया गया है। इसका परिणाम अगले कुछ वर्षों में आएगा। किसानों के हित में फसल, सब्जियों की खेती से जुड़े अन्य शोध भी जल्द शुरू होंगे। -डॉ. तुषार कांति बेहेरा, निदेशक, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान
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शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. तुषार कांति बेहेरा के निर्देशन में डॉ. राज बहादुर यादव और उनकी टीम ने शोध कर नया तरल उर्वरक तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि यह मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में कारगर है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजबहादुर यादव ने बताया कि इस तरल उर्वरक को कॉपर, आयरन, जिंक, मैगनीज, बोरान, मालीबेटनम को मिलाकर बनाया गया है। इन सभी का मिश्रण बनाकर सब्जी के फसल के अनुरूप किया गया है। इसके बाद इसमें देखा गया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर हो जा रही है। पौधे की वृद्धि और उपज में भी अच्छा सुधार हुआ है।
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तीन साल में पूरा हुआ शोध
वैज्ञानिक डॉ. राजबहादुर यादव बताते हैं कि उन्होंने सब्जियों की खेती के लिए इस तरल उर्वरक बनाने का शोध 2018 में शुरू किया था और 2021 में शोध पूरा हुआ है। इसमें उनके साथ डॉ. जगदीश सिंह, डॉ. हरेकृष्णा, डॉ. राजीव कुमार भी शामिल रहे। बताया कि जो मिश्रण तैयार किया गया है, उसका फिलहाल 100 ग्राम का पैकेट तैयार कराया गया है। किसानों को इसकी जानकारी भी दी जा रही है। मिश्रण को घोल बनाकर छिड़काव किया जाता है।
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बीज की रोपाई के 30 दिन बाद छिड़काव
सब्जियों में फूलगोभी, बंद गोभी, टमाटर, भिंडी एवं लोबिया के बीज की बुवाई के 30 दिन बाद इस मिश्रण का छिड़काव पौधे पर किया जाता है। शोध में यह देखा गया है कि छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर करने पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर होती है।
तरल उर्वरक के प्रयोग के लिए शोध में सफलता के बाद कद्दू वर्गीय सब्जियों पर भी शोध शुरू कर दिया गया है। इसका परिणाम अगले कुछ वर्षों में आएगा। किसानों के हित में फसल, सब्जियों की खेती से जुड़े अन्य शोध भी जल्द शुरू होंगे। -डॉ. तुषार कांति बेहेरा, निदेशक, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान