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काशी की मिट्टी की सेहत बेहद खराब, उत्पादन पर असर
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जिले में जैविक खेती के लिए किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित किया जा रहा है। दूसरी ओर काशी की उपजाऊ मिट्टी की सेहत बेहद खराब है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के तहत मृदा परीक्षण विभाग की ओर से जिले में 27,753 नमूनों की जांच की गई थी। खेत में मिट्टी के पोषक तत्व और सूक्ष्म तत्वों की मात्रा मानक से कम पाई गई। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। जिसकी भरपाई के लिए किसान धड़ल्ले से रसायनों का इस्तेमाल कर खेती कर रहे हैं। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 के तहत 34 हजार मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य शासन से मिला था। 27,753 नमूनों के जांच परिणाम में जिले के उपजाऊ खेतों में मुख्य पोषक तत्व जीवांश कार्बन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा कम पाई गई है। इसी तरह सल्फर, जस्ता, लोहा, तांबा, बोरान जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा भी नाकाफी मिली।
चांदपुर स्थित क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष राजेश्वर प्रसाद शर्मा ने बताया कि एक स्वस्थ मिट्टी में पोषक तत्वों में जीवांश कार्बन 0.80 प्रतिशत, एक हेक्टेयर में 40 किलो ग्राम फास्फोरस और पोटाश की मात्रा 250 किलो प्रति हेक्टेयर भूमि में पर्याप्त मानी जाती है। जबकि जांच में पाया कि ज्यादातर नमूनों में जीवांश कार्बन और फास्फोरस की मात्रा अति न्यून और न्यून स्तर पर पाई गई। पोटाश की स्थिति मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। सल्फर, जस्ता, लोहा, तांबा, बोरान जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा 0.4 से 15 पीपीएम के बीच होनी चाहिए। जांच में सूक्ष्म तत्वों की मात्रा 1.3 से 2.98 के बीच पाई गई। मिट्टी की जांच के लिए काशी विद्यापीठ से 3,243, आराजीलाइन से 5,451, सेवापुरी से 3,878, चोलापुर से 2192, बड़ागांव से 4,125, चिरईगांव से 2,272, पिंडरा से 1,871 और हरहुआ ब्लॉक से 4,721 नमूने लिए गए।
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चांदपुर स्थित क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष राजेश्वर प्रसाद शर्मा ने बताया कि एक स्वस्थ मिट्टी में पोषक तत्वों में जीवांश कार्बन 0.80 प्रतिशत, एक हेक्टेयर में 40 किलो ग्राम फास्फोरस और पोटाश की मात्रा 250 किलो प्रति हेक्टेयर भूमि में पर्याप्त मानी जाती है। जबकि जांच में पाया कि ज्यादातर नमूनों में जीवांश कार्बन और फास्फोरस की मात्रा अति न्यून और न्यून स्तर पर पाई गई। पोटाश की स्थिति मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। सल्फर, जस्ता, लोहा, तांबा, बोरान जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा 0.4 से 15 पीपीएम के बीच होनी चाहिए। जांच में सूक्ष्म तत्वों की मात्रा 1.3 से 2.98 के बीच पाई गई। मिट्टी की जांच के लिए काशी विद्यापीठ से 3,243, आराजीलाइन से 5,451, सेवापुरी से 3,878, चोलापुर से 2192, बड़ागांव से 4,125, चिरईगांव से 2,272, पिंडरा से 1,871 और हरहुआ ब्लॉक से 4,721 नमूने लिए गए।
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