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Kashi: दूल्हा के देहीं से भस्मी छोड़ावा सखी..., 350 वर्षों में पहली बार अयोध्या की हल्दी से सजे काशीपुराधिपति

Thu, 07 Mar 2024 06:01 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 07 Mar 2024 06:01 PM IST
सार

Kashi: ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित गीत गाए गए। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए साठी क चाऊर चूमिय चूमिय.. गीत गाकर महिलाओं ने भगवान शिव की रजत मूर्ति को चावल से चूमा।

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Kashi Puradhipati decorated with turmeric Ayodhya first time in 350 years
बाबा की पंचबदन रजत प्रतिमा को हल्दी लगाती महिला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दूल्हा के देहीं से भस्मी छोड़ावा सखी हरदी लगावा ना... की धुन जब गवनहरियों के होठों पर सज रही थी तो दूसरी ओर भूतभावन काशीपुराधिपति को हल्दी लगाई जा रही थी। 350 साल के इतिहास में पहली बार बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत प्रतिमा को अयोध्या से आई हल्दी लगाकर शिव-पार्वती विवाह उत्सव की शुरुआत की गई।

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टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर बाबा के रजत विग्रह का प्रतीक आगमन हुआ। अयोध्या के रामायणी पं. वैद्यनाथ पांडेय के परिवार से भेजी गई हल्दी संध्या बेला में शिव को लगाई गई। बाबा को खास बनारसी ठंडाई, पान और पंचमेवा का भोग लगाया गया। हल्दी की रस्म के लिए गवनहिरयों की टोली पूर्व महंत आवास पहुंची।
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संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का विशेष राजसी-स्वरूप में शृंगार कर भोग लगाया। फिर आरती उतारी। बाबा के तेल-हल्दी की रस्म पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के सानिध्य में हुई। पूजन-अर्चन का विधान उनके पुत्र पं. वाचस्पति तिवारी ने पूरा किया। 
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ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित गीत गाए गए। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए साठी क चाऊर चूमिय चूमिय.. गीत गाकर महिलाओं ने भगवान शिव की रजत मूर्ति को चावल से चूमा।

गवनहारियों ने टोली ने बाबा की पंचबदन प्रतिमा के समक्ष पहिरे ला मुंडन क माला मगर दुल्हा लजाला..., शिव दूल्हा के माथे पर सोहे चनरमा..., अड़भंगी क चोला उतार शिव दूल्हा बना जिम्मेदार और भोले के हरदी लगावा देहिया सुंदर बनावा सखी... जैसे हल्दी के पारंपरिक शिव गीतों में दूल्हे की खूबियों का बखान किया।

अर्धांग भस्म भभूत सोहे अर्ध मोहिनी रूप है...

महंत आवास पर शिवांजलि में वृंदावन से आई भक्तों की टोली ने शिव-पार्वती प्रसंग को नृत्य की भंगिमाओं और भावों के माध्यम से जीवंत किया। शुरुआत उन्होंने अर्धांग भस्म भाभूत सोहे अर्ध मोहिनी रूप है... पर भावपूर्ण नृत्य से की। इसके बाद भगवान शिव के भजन हे शिव शंकर हे गंगा धर करुणा कर करतार हरे... पर नृत्य किया।

पारंपरिक कथक नृत्य के अंतर्गत गणेश परन और शिव परन की प्रस्तुति विशेष रही। समापन होली गीत पर नृत्य से किया। गीत के बोल थे कैसी ये धूम मचाई बिरज में...।

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