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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kashi Music and Arts Festival beats of Pt. Puran Maharaj tabla resonated to the vocals of his daughter

काशी संगीत कला महोत्सव: 13 साल की बेटी के बोल पर गूंजी पं. पूरन महाराज के तबले की थाप, मुग्ध हुए दर्शक

Sun, 29 Mar 2026 02:25 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 29 Mar 2026 02:25 PM IST
सार

Varanasi News: धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने दीप प्रज्ज्वलन के बाद संगीत की महिमा का बखान किया। कहा कि शास्त्रीय संगीत को पंचम वेद की मान्यता है।

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Kashi Music and Arts Festival beats of Pt. Puran Maharaj tabla resonated to the vocals of his daughter
बेटी अवंतिका के साथ प्रस्तुति देते पंडित पूरन महाराज। - फोटो : संवाद

विस्तार

काशी संगीत कला महोत्सव में बनारस घराने के पुरोधा रहे तबला सम्राट पं. किशन महाराज के 70 साल के बेटे प्रख्यात कलाकार पं. पूरन महाराज ने तबले पर अप्रचलित बंदिशों को पेश कर सभी को चकित कर दिया। खास ये था कि पूरन महाराज की 13 साल की पुत्री अवंतिका महाराज उनके के साथ बोल पढ़ंत कर बंदिशों को विस्तार देकर अपने दादा की छवि को साकार किया। 

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महोत्सव की दूसरी निशा के तीसरे प्रहर में उन्होंने तबले पर घराने की थाती कहे जाने वाले पं. कंठे महाराज, पं. बलदेव महाराज, पं. भैरव सहाय, पं. राम सहाय की पुरानी बंदिशों को तबले पर साधा। उन्होंने उडंत का गत, त्रिपली, चौपल्ली, काली परन, सबलय, झूलना, सवाई, एक हथी परन, बढई आदि रचनाएं बजाकर सभी को तृप्त कर दिया। छठवीं प्रस्तुति में कोलकाता के पं. दीपक एवं प्रकाश मिश्र का युगल गायन हुआ। सातवीं प्रस्तुति में युवा कथक नर्तक अमृत मिश्र के नृत्य ने सभी को मुग्ध कर दिया। निशा की अंतिम प्रस्तुति सुबह 6:30 बजे तक चली। 

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20 कलाकारों ने सुर, लय और ताल से की नादब्रह्म की उपासना
बनारस घराने की संगीत को सहेजने के लिए शुरू हुए काशी संगीत कला महोत्सव की अंतिम निशा में घराने के शीर्षस्थ 20 से अधिक कला साधकों ने सुर, लय और ताल से धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ में नादब्रह्म की उपासना की। स्व. पं. राजन मिश्र के पुत्र रितेश-रजनीश मिश्र की जोड़ी ने गहराती निशा को जागृत कर दिया। दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल के मंच पर एस तेजस्वी शशांक ने सांकेतिक निशा की शुरू से शुरुआत की। 

उन्होंने राग यमन कल्याण में द्रुत एक ताल की बंदिश के बाद चैती गाया। दूसरी प्रस्तुति लखनऊ के पं. रविनाथ मिश्र एवं आराध्य मिश्र के तबला वादन की रही। उन्होंने सोलह मात्राओं की बंदिश तीन ताल में सुनाई। उसके बाद बनारस घराने के पारंपरिक उठान, कायदा, आड़ी लय, बराबर लय, टुकड़ा, रेला, जातफर्द सुनाकर समापन किया। तीसरी प्रस्तुति में विदुषी सुचरिता गुप्ता ने राग मिश्र तलंग में ठुमरी के बाद दादरा सुनाया, बोल थे- चित ले गयो मोरे सवारियां। 

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चौथी प्रस्तुति नई दिल्ली के बांसुरी वादक पं. राजेंद्र प्रसन्ना की रही। उन्होंने विभिन्न रोग पर बंदिशें को बांसुरी की सुरीली धुनों में पिरोकर सभी को मदमस्त कर दिया। तबले पर ललित कुमार एवं सह बांसुरी पर राकेश कुमार रहे। दिल्ली से आए रितेश-रजनीश मिश्र ने मंच संभाला तो सुधि श्रोता भी दम साधे रहे। 

उन्होंने सबसे पहले राग जोग कौंश में विलंबित एक ताल में बंदिश सुनाई। अंत में उन्होंने अपने पिता की स्मृति में उनका एक प्रख्यात भजन भी सुनाया। इस मौके पर पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू, पं. कमेश्वनाथ मिश्र, पं. पूरण महाराज आदि रहे। संयोजक धर्मसंघ महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने कलाकारों का सम्मान किया। संचालन अंजना झा व अरविंद मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन पं. देवब्रत मिश्र ने दिया। 

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