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करपात्र प्राकट्योत्सव : अनुष्ठानों के साथ विद्वानों का सम्मान, जुटेंगे कुलपति व शिक्षाविद

Mon, 10 Aug 2026 01:46 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:46 AM IST
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Karpatri Prakatyotsav: Scholars to be honored alongside rituals; Vice-Chancellors and educationists to gather
वाराणसी में रविवार को दुर्गाकुड़ ​स्थित धर्मसंघ में कलप्राती मोहत्सव को लेकर जानकारी देते चैतन्
धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोभूमि धर्मसंघ शिक्षा मंडल दुर्गाकुंड में 119वें करपात्र प्राकट्योत्सव का शुभारंभ मंगलवार को होगा। सात दिवसीय महोत्सव में 14 अगस्त को करपात्र प्राकट्य दिवस पर आचार्य पं. गायत्री प्रसाद पांडेय को करपात्र रत्न एवं आचार्य डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र को करपात्र गौरव सम्मान मिलेगा। नई शिक्षा नीति पर विचार-विमर्श के लिए कुलपति सम्मेलन में 15 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविद जुटेंगे। करपात्र दीपावली में 43 हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे।
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धर्मसंघ में रविवार को संघ के पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने पत्रकारों को बताया कि मंगलवार को महोत्सव का शुभारंभ गणपति लाक्षार्चन से होगा। 11 को सुबह सात बजे से एक लाख किशमिश (द्राक्षा फल) से गणपति की आराधना होगी। 12 अगस्त को सुबह नौ बजे से 121 दंपती सामूहिक रुद्राभिषेक करेंगे। 13 को प्राकट्य दिवस की पूर्व संध्या पर गोधूलि बेला में करपात्र दीपावली मनाई जाएगी। स्वामी करपात्री के प्रकट हुए दिन के बराबर 43435 दीपक एक साथ जलाए जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि चौथे दिन 14 को करपात्र प्राकट्य दिवस पर शाम चार बजे से सम्मान समारोह होगा। 15 को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। 16 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और स्वामी करपात्री जी के शिक्षण दर्शन विषय पर कुलपति सम्मेलन होगा। इसमें देशभर के 15 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति व शिक्षाविद शामिल होंगे। धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि अंतिम दिन 17 को गौरी केदारेश्वर जलाभिषेक यात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा धर्मसंघ से निकलेगी। गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन होगा। इसके साथ ही प्राकट्य महोत्सव की पूर्णाहुति होगी।
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गो रक्षा के साथ गायों के बचाएं नस्लें
स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने गो रक्षा के लिए सनातनियों को आगे आने का आह्वान किया। कहा कि जब तक गो माता को बचाने के लिए जागरूकता नहीं आएगी तब तक देश का कल्याण नहीं होगा। वेदों में गायों की नस्लों का भी वर्णन है। कहा गया है कि गंगातीरी गायों के सुबह देखने मात्र से कष्ट दूर हो जाता है। हमें इन नस्लों को भी बचाना होगा।
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