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Varanasi News : कपाली बाबा बोले, नागा संन्यासी, अघोरी, साधु और बाबा के गणों के लिए है मसान की होली
Sun, 09 Mar 2025 11:22 PM IST
नितीश कुमार पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: नितीश कुमार पांडेय
Updated Sun, 09 Mar 2025 11:22 PM IST
सार
कपाली बाबा ने मसान की होली पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये होली नागा सन्यासी,अघोरी और साधु गणों के लिए है। इसका वीभत्स स्वरूप नहीं है।
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मसान होली पर बोलते कपाली बाबा
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
घोरपीठ के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चंडेश्वर कपाली बाबा ने कहा कि मसान की होली काशी की धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। इस परंपरा का निर्वहन नागा संन्यासी, अघोर परंपरा के साधक, संन्यासी व अन्य विरक्त परंपराओं के संतों के साथ ही किन्नर समुदाय लोग करते आ रहे हैं। यह होली विरक्तों और समाज के उस वर्ग के लिए है जिसे समाज में नहीं सिर्फ महादेव के दरबार में सम्मान मिला है।
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रविवार को हरिश्चंद्र घाट पर प्रेसवार्ता के दौरान कपाली बाबा ने कहा कि संपूर्ण काशी को ही महाश्मशान कहा गया है जो कि भगवान शिव के आनंदमय कोष से निर्मित है। इसलिए इसे आनंदवन भी कहा गया है। यह अविमुक्त क्षेत्र माना गया है, यह महादेव के त्रिशूल पर बसी है। अतः यह सामान्य नियमों को स्वीकार नहीं करती। काशी उत्सवधर्मी है यहां मृत्यु का भी उत्सव मनाया जाता है।
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भूत भावन भगवान शंकर का मुख्य शृंगार भस्म ही है। कुछ विधर्मी इस आयोजन को वीभत्स स्वरूप देने का प्रयास कर रहे हैं जो उचित नहीं है। दोनों ही श्मशान पर भगवान मसान की विशेष पूजा, नारायण स्वरूप भगवान दत्तात्रेय की पूजा चिता भस्म से करने के बाद चिता-भस्म रूपी शिव निर्माल्य को अपने मस्तक पर धारण करते हैं।
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