फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kanthe Maharaj death anniversary celebrated in Varanasi he had played the tabla

पुण्यतिथि: कंठे महाराज तो नाद के आदिदेव महादेव के नंदी हैं..., चंद्रकांता को पढ़ने के लिए सीखी हिंदी

Thu, 01 Aug 2024 01:31 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 01 Aug 2024 01:31 PM IST
सार

Varanasi News: गुरुवार को तबला वादक कंठे महाराज और लेखक देवकीनंदन खत्री की पुण्यतिथि है। साहित्य घराने में दोनों विद्वानों में याद किया जा रहा है। कई जगह आयोजन भी हो रहे हैं।

विज्ञापन
Kanthe Maharaj death anniversary celebrated in Varanasi he had played the tabla
कंठे महाराज और देवकीनंदन खत्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैं तो शीतला स्वरूपा, मैहर माई का गर्दभ हूं पर कंठे महाराज तो नाद के आदिदेव महादेव के नंदी हैं। मैं इनकी फनकारी को सलाम बजाता हूं...। यह कहना था मैहर घराने के सरोद वादक बाबा अलाउद्दीन खां साहब का। 

विज्ञापन


1960 में सनातन धर्म इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित संगीत समारोह की युगलबंदी के बाद खां साहब ने मंच से जब यह बात कही थी तो पं. कंठे महाराज की आंखों से आंसू बहने लगे थे।
विज्ञापन


पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए तबला वादक पं. पूरन महाराज ने बताया कि पं. कंठे महाराज को तबला सम्राट यूं ही नहीं कहा जाता था। उन्होंने 70 सालों तक देश के सभी विख्यात गायक और नर्तकों के साथ तबले पर संगत किया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पिताजी पं. किशन महाराज के तबले में जो निखार आया था यह उनकी ही देन थी। उन्होंने 1954 में ढाई घंट लगातार तबला बजाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। वह सभी शैलियों में तबला बजाते थे लेकिन उनकी विशेषता बनारस बाज में थी। 

1880 में कबीरचौरा मोहल्ले में उनका जन्म हुआ था और उनके पिता पं. दिलीप मिश्र तबला वादक थे। एक अगस्त 1969 को उनका निधन हुआ था। उनको पहला तबला वादक माना जाता है, जिन्होंने तबले के जरिये स्तुति प्रस्तुत की थी। इनकी आरंभिक संगीत शिक्षा बलदेव सहाय से आरंभ हुई थी। 1961 में इन्हें संगीत नाटक अकादमी ने सम्मानित किया था।

तिलिस्मी लेखक थे देवकीनंदन खत्री
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लिखा था कि जितने हिंदी पाठक बाबू देवकीनंदन खत्री ने उत्पन्न किए उतने किसी और ग्रंथकार ने नहीं किए। चंद्रकांता उपन्यास इतना लोकप्रिय था कि जो हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे, उन्होंने केवल इस उपन्यास को पढ़ने के लिए हिंदी सीखी। पहली बार तिलिस्मी दुनिया से रूबरू कराने वाले लेखक देवकीनंद खत्री की पुण्यतिथि एक अगस्त को मनाई जाएगी।

साहित्यकार सुरेंद्र वाजपेयी का कहना है कि देवकीनंदन खत्री यहीं नहीं रुके। उन्होंने दूसरा उपन्यास चंद्रकांता संतति लिखा तो वह काफी रोचक था। चंद्रकांता संतति ने इतनी लोकप्रियता बटोरी कि इस पर धारावाहिक भी बना जो काफी लोकप्रिय हुआ। 

सभी ने अय्यारी, तिलिस्म, फनकारी के साथ ही नौगढ़ व विजयगढ़ के रहस्यों को बेहद करीब से जाना। इन उपन्यासों को पढ़ते वक्त लोग खाना-पीना भी भूल जाते थे। इनकी भाषा इतनी सरल है कि इन्हें पांचवीं कक्षा के छात्र भी पढ़ लेते थे। पहले दो उपन्यासों के दो हजार पृष्ठ से अधिक होने पर भी एक भी क्षण ऐसा नहीं आता जहां पाठक ऊब जाए।

हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक देवकीनंदन खत्री का जन्म बिहार के समस्तीपुर में 18 जून 1861 को हुआ था। उनके पिता ईश्वरदास काशी के लाहौरी टोला में आकर बस गए। धाम के निर्माण के बाद अब लाहौरी टोला का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। 

राम कटोरा वाले मकान में उनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी के लोग रहते हैं। देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता के अलावा काजल की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त गोदना, कटोरा भर, भूतनाथ जैसी रचनाएं कीं। भूतनाथ को उनके पुत्र दुर्गा प्रसाद खत्री ने पूरा किया।

देवकीनंद खत्री ने नौगढ़ के जंगलों के ठेके लिए। कई-कई दिनों तक वह चकिया एवं नौगढ़ के बीहड़ जंगलों, पहाड़ियों और प्राचीन ऐतिहासिक इमारतों के खंडहरों की खाक छानते रहते थे। 

इन्हीं जंगलों, पहाड़ियों और प्राचीन ऐतिहासिक इमारतों के खंडहरों की पृष्ठभूमि में अपने तिलिस्म और अय्यारी के कारनामों की कल्पनाओं को मिश्रित कर उन्होंने चन्द्रकांता उपन्यास की रचना की। उन्होंने वाराणसी में लहरी प्रेस नाम से एक प्रिंटिंस प्रेस की स्थापना की और 1900 में हिंदी मासिक सुदर्शन का प्रकाशन शुरू किया। देवकीनंद खत्री का निधन एक अगस्त 1913 को वाराणसी में ही हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed