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काशी के कोतवाल का पहली बार लाल कपड़े पर बाल स्वरूप राजर्षि शृंगार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:52 AM IST
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कालभैरव बाबा का किया गया श्रृंगार
- फोटो : amar ujala
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काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के जन्मदिन पर मंगलवार को मंदिर में बाबा का बरही महोत्सव मनाया गया। षोडषोपचार विधि से पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद आम दर्शनार्थियों ने दर्शन-पूजन किए।
बाबा के अभिषेक के बाद दोपहर में पंचामृत से शृंगार किया गया। विश्व के कल्याणार्थ पहली बार बाबा का लाल कपड़े पर बाल स्वरूप राजर्षि शृंगार किया गया। अमूमन मुखौटा युक्त बाबा का शृंगार किया जाता है।
बाबा को नवरत्नों की माला और गहना के अलावा उनके प्रिय भोग लगाए गए। दौना, गुलाब, गेंदा, चमेली आदि के फूलों से बाबा का शृंगार किया गया। मंदिर के महंत लिंगिया महाराज और उप महंत अवशेष पांडेय ने बाबा की महाआरती की।
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उन्होंने बताया कि बाल स्वरूप कालभैरव के दर्शन से पाप से मुक्ति मिलती है। इस मौके पर भक्तों ने बाबा का बरा और मदिरा चढ़ाई। भक्तों ने बाबा के अखंड दीप के लिए तेल और काला धागा भी दान किया। देर रात बाबा की भव्य आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
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बाबा के अभिषेक के बाद दोपहर में पंचामृत से शृंगार किया गया। विश्व के कल्याणार्थ पहली बार बाबा का लाल कपड़े पर बाल स्वरूप राजर्षि शृंगार किया गया। अमूमन मुखौटा युक्त बाबा का शृंगार किया जाता है।
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बाबा को नवरत्नों की माला और गहना के अलावा उनके प्रिय भोग लगाए गए। दौना, गुलाब, गेंदा, चमेली आदि के फूलों से बाबा का शृंगार किया गया। मंदिर के महंत लिंगिया महाराज और उप महंत अवशेष पांडेय ने बाबा की महाआरती की।
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उन्होंने बताया कि बाल स्वरूप कालभैरव के दर्शन से पाप से मुक्ति मिलती है। इस मौके पर भक्तों ने बाबा का बरा और मदिरा चढ़ाई। भक्तों ने बाबा के अखंड दीप के लिए तेल और काला धागा भी दान किया। देर रात बाबा की भव्य आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।