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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kaal Bhairav Ashtami 2024 Yatra organised on occasion of Bhairav Ashtami festival in Varanasi

Kaal Bhairav Ashtami 2024: आज निकलेगी अष्टभैरव प्रदक्षिणा यात्रा, काटा जाएगा 11 सौ किलो का केक

Sat, 23 Nov 2024 07:48 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 23 Nov 2024 07:48 AM IST
सार

Kaal Bhairav Ashtami 2024 : महादेव की नगरी काशी में काल भैरव अष्टमी के अवसर पर अष्टभैरव प्रदक्षिणा यात्रा निकलेगी। इस पर 11 सौ किलो का केक काटा जाएगा। 

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Kaal Bhairav Ashtami 2024 Yatra organised on occasion of Bhairav Ashtami festival in Varanasi
काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान भैरव का प्राकट्योत्सव 23 नवंबर को मनाया जाएगा। भगवान शिव के अवतार कालभैरव के प्राकट्योत्सव का पर्व शहर के भैरव मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाएगा। अष्टभैरव प्रदक्षिण यात्रा के साथ ही काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के मंदिर में 1100 किलोग्राम का केक काटकर जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

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देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में रुद्रावतार बाबा भैरवनाथ के प्राकट्य पर्व को महाभैरवाष्टमी के रूप में मनाया जाएगा। श्रद्धालु बाबा भैरवनाथ के आठ स्वरूपों का दर्शन पूजन करेंगे। अनादिकालेश्वर बाबा श्री लाट भैरव का भव्य अन्नकूट शृंगार किया जाएगा।
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बाबा दरबार में भक्तों को अष्ट भैरव की मनोरम झांकी के दर्शन होंगे। नगरवधुएं अपनी हाजिरी लगाएंगी। श्री लाटभैरव काशी यात्रा मंडल की ओर से अष्ट भैरव प्रदक्षिणा यात्रा की जाएगी। काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के मंदिर में 11 सौ किलोग्राम का केक काटा जाएगा।

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लिंगाकार रूप में पूजे जाते हैं लाटभैरव

बाबा के लाट भैरव नाम का भी इतिहास है। कपाल भैरव बाबा श्री लाट भैरव का ही पौराणिक नाम है। लाट भैरव शब्द अंग्रेजी शासन में अंग्रेजों द्वारा दिया गया। काशी में इसी नाम से बाबा विख्यात हैं। बाबा कपाल भैरव प्रसिद्ध लाट भैरव का दर्शन विशाल लिंगाकार स्वरूप में होता है। अन्य सभी भैरव मूर्त रूप या पिंड रूप में दर्शनीय हैं। किंतु बाबा लाट भैरव लिंग रूप में प्रथम भैरव हैं। इस कारण इन्हें कपालेश्वर महादेव के रूप में भी पूजा जाता हैं।

बाबा कपाल भैरव काशी में वास करने वाले लोगों के पाप और पुण्य कर्मों का शोधन करने वाले देवता हैं। इसका प्रमाण मंदिर के गर्भगृह में विद्यमान अष्ट भैरव के चौकियों से प्रत्यक्ष तौर पर मिलता है।न्यायाधीश की भूमिका में बाबा श्री कपाल भैरव कर्मानुसार काशीवासियों के सद्कर्मो के पुण्य फल तथा पापकर्मों के निमित्त दंड का विधान तय करते हैं।
 
काशी में विराजमान हैं अष्टभैरव
काशी में अष्टभैरव विराजमान हैं। इसमें दुर्गाकुंड पर चंड भैरव, हनुमानघाट पर रुद्रभैरव, कमच्छा पर क्रोधन भैरव व उन्मत्त भैरव, नखास पर भीषण भैरव, दारानगर में असितांग भैरव, सरैयां में लाट भैरव, गायघाट पर संहार भैरव विराजमान हैं। श्री कालभैरव को काशी का कोतवाला माना जाता है।

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