ज्येष्ठा गौरी पूजन: 16 तरह के व्यंजन व मिठाई का लगाया भोग, माला से शृंगार; अर्पित किया 16 गांठ वाला धागा
ज्येष्ठा गौरी को सोलह गांठ वाला पीला धागा अर्पित किया गया। इसके बाद महानैवेद्य लगाया गया, जिसमें सोलह प्रकार के व्यंजन, सोलह प्रकार के मिष्ठान, सोलह प्रकार की सब्जियां, सोलह प्रकार के रायते व चटनियां शामिल थीं। इसके बाद महाआरती की गई।
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Varanasi News: मराठी समाज के तीन दिवसीय ज्येष्ठा गौरी पूजन के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 16 गांठ वाला धागा अर्पित किया। 16 तरह के व्यंजन व मिष्ठान्न का भोग लगाने के साथ ही 16 तरह की मालाओं से माता का शृंगार किया गया। सोमवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर विधि-विधान के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी का पूजन किया गया।
श्री काशी महाराष्ट्र सेवा समिति के ट्रस्टी संतोष सोलापुरकर ने बताया कि काशी में रहने वाले लगभग 500 मराठा परिवारों में ज्येष्ठागौरी का पूजन धूमधाम से हुआ। पहले दिन 31 अगस्त यानि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अनुराधा नेक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी/ महालक्ष्मी का पंचोपचार कर आवाह्न किया गया। सोमवार को ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी का पूजन किया गया। महिलाओं ने मुख्य द्वार से लेकर गौरी जी के स्थल तक रंगोली बनाई। कुंकू (रोली) से गौरी के पैर बनाए।
जुटे रहे भक्त
इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी की षोडषोपचार विधि से पूजा की गई। ज्येष्ठा गौरी का पंचामृत व श्रीसूक्त से अभिषेक किया गया। ज्येष्ठा गौरी का सोलह प्रकार की मालाओं से शृंगार किया गया। अंत में ज्येष्ठे, श्रेष्ठे, तपोनिष्ठे, धर्मीष्ठे, सत्यवाहिनी, समुद्रवसने देवी, ज्येष्ठा गौरी नमोस्तुते... मंत्र के ज्येष्ठा गौरी को विशेष अर्घ्य दिया गया।
परिवार के सभी लोगों ने विशेष कर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य के साथ सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। ट्रस्टी ने बताया कि ज्येष्ठा गौरी को केले के पत्ते पर भोग लगाया गया। बताया कि इस दिन अरवी के पत्ते से बनी पकौड़ी का विशेष महत्व है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष नवमी को मूल नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी की पंचोपचार पूजन कर विदाई की जाएगी।