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डाक अदालत में न्याय मिला न अधिकारी
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डाक विभाग की ओर से शुक्रवार को पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में डाक अदालत लगाई गई। यहां कई फरियादी न्याय के लिए पहुंचे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। फरियादी समस्या के समाधान के लिए बाबुओं की टेबल के आसपास चक्कर लगाते रहे, लेकिन अधिकारी अपने चेंबर में बैठे रहे और फरियादियों से नहीं मिले। अंतत: फरियादी समस्या के निस्तारण के बिना ही घर लौट गए।
पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय की ओर से पोस्टमास्टर जनरल की अध्यक्षता में डाक विभाग की सेवाओं से संबंधित समस्याओं और शिकायतों के निस्तारण के लिए डाक अदालत लगाई थी। इसमें नई शिकायतें तो नर्हीं आइं, लेकिन कुछ लोग अपनी पुरानी समस्या लेकर डाक अदालत में पहुंचे। इनमें दो महिला ऐसी थीं जिनका दो साल पहले गबन के मामले में हजारों रुपये फं स गए, इसे पाने के लिए आज भी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं।
आवेदन देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान
पहड़िया के संजय नगर कॉलोनी निवासी लता श्रीवास्तव ने बताया कि दो साल पहले गबन का मामला सामने आने के बाद से 75 हजार रुपये फंसे हैं। पति कैलाश श्रीवास्तव के रोडवेज से सेवानिवृत्त होने के बाद खाते में कुछ रकम को रखा था। इसे पाने के लिए आवेदन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। सोचा डाक अदालत में निस्तारण होगा, लेकिन यहां तो अधिकारी फरियादियों से मिलने ही नहीं आए। इसी तरह डाक अदालत में महेंद्र पाल 13 लाख और सत्यनारायण 18 लाख की रकम की समस्या लेकर पहुंचे थे।
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पीएमजी बोले, चार मामले आए
पोस्टमास्टर जनरल (पीएमजी)कृष्ण कुमार यादव के मुताबिक, डाक अदालत में पहला मामला पुरुषोत्तम कुमार का टीडीएस भुगतान से संबंधित था, जो कि एक सितंबर को फाइल कर दिया गया है। अन्य तीन मामले वाराणसी कैंट प्रधान डाकघर में गबन से संबंधित थे, इसमें सिद्धार्थ पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय और पुष्पा पांडेय सहित 13 खाते शामिल हैं। इनमें एक खाते का भुगतान हेतु ज्ञापन जारी किया जा चुका है, वहीं चार खाते रिस्टोरेशन के लिए सेंटर फॉर एक्सेलेंस इन पोस्टल टेक्नोलॉजी, चेन्नई को भेजे जा चुके हैं। दो खातों में हस्ताक्षर में भिन्नता होने के कारण फोरेंसिक लैब में भेजने के निर्देश दिए गए हैं तथा छह खातों में भुगतान की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।
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पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय की ओर से पोस्टमास्टर जनरल की अध्यक्षता में डाक विभाग की सेवाओं से संबंधित समस्याओं और शिकायतों के निस्तारण के लिए डाक अदालत लगाई थी। इसमें नई शिकायतें तो नर्हीं आइं, लेकिन कुछ लोग अपनी पुरानी समस्या लेकर डाक अदालत में पहुंचे। इनमें दो महिला ऐसी थीं जिनका दो साल पहले गबन के मामले में हजारों रुपये फं स गए, इसे पाने के लिए आज भी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं।
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आवेदन देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान
पहड़िया के संजय नगर कॉलोनी निवासी लता श्रीवास्तव ने बताया कि दो साल पहले गबन का मामला सामने आने के बाद से 75 हजार रुपये फंसे हैं। पति कैलाश श्रीवास्तव के रोडवेज से सेवानिवृत्त होने के बाद खाते में कुछ रकम को रखा था। इसे पाने के लिए आवेदन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। सोचा डाक अदालत में निस्तारण होगा, लेकिन यहां तो अधिकारी फरियादियों से मिलने ही नहीं आए। इसी तरह डाक अदालत में महेंद्र पाल 13 लाख और सत्यनारायण 18 लाख की रकम की समस्या लेकर पहुंचे थे।
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पीएमजी बोले, चार मामले आए
पोस्टमास्टर जनरल (पीएमजी)कृष्ण कुमार यादव के मुताबिक, डाक अदालत में पहला मामला पुरुषोत्तम कुमार का टीडीएस भुगतान से संबंधित था, जो कि एक सितंबर को फाइल कर दिया गया है। अन्य तीन मामले वाराणसी कैंट प्रधान डाकघर में गबन से संबंधित थे, इसमें सिद्धार्थ पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय और पुष्पा पांडेय सहित 13 खाते शामिल हैं। इनमें एक खाते का भुगतान हेतु ज्ञापन जारी किया जा चुका है, वहीं चार खाते रिस्टोरेशन के लिए सेंटर फॉर एक्सेलेंस इन पोस्टल टेक्नोलॉजी, चेन्नई को भेजे जा चुके हैं। दो खातों में हस्ताक्षर में भिन्नता होने के कारण फोरेंसिक लैब में भेजने के निर्देश दिए गए हैं तथा छह खातों में भुगतान की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।