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Jivitputrika Vrat 2021: कलियुग में मां काली की उपासना से होता है सभी दुखों का निवारण, जीवित्पुत्रिका पर बन रहा खास संयोग 

Tue, 28 Sep 2021 04:41 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 28 Sep 2021 04:41 PM IST
सार

अश्विन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी पर काली जयंती और जीवित्पुत्रिका का अद्भुत संयोग बन रहा है। जीवित्पुत्रिका पूजनोत्सव कल मनाया जाएगा।
 

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Jivitputrika Vrat 2021 Date Worshiping Maa Kali in Kaliyuga removes all sorrows
Jivitputrika Vrat - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अश्विन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी पर काली जयंती और जीवित्पुत्रिका का अद्भुत संयोग बन रहा है। कलियुग में जहां मां काली की उपासना से सभी दुखों का निवारण होता है वहीं जीवित्पुत्रिका के व्रत से महिलाएं अपने पुत्रों की रक्षा व लंबी आयु की कामना करती हैं। वाराणसी में दक्षिणेश्वर काली मंदिर में जीवित्पुत्रिका का पूजन और मां काली की जयंती मनाई जाएगी। जीवित्पुत्रिका पूजनोत्सव बुधवार को मनाया जाएगा।

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दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी राजू गिरी ने बताया कि प्राणियों के कष्ट हरने के लिए मां काली अवतार लेती रहती हैं। वह पृथ्वी पर विश्व का सृजन, सज्जनों का पालन और दुष्टों का संहार भी करती हैं। सत्व, रज और तम गुणों को धारण करने वाली मां काली भक्तों का कल्याण करती हैं। तंत्रशास्त्र में कहा गया है कि कलौ काली कलौ काली नान्य देव कलौ युगे। यह भी कहा गया है कि कालिका मोक्षदा देवी कलौ शीघ्र फलप्रदा। कलियुग में भगवती काली की उपासना से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
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अभीष्ट सिद्धिदायक है व्रत
शास्त्रों में कलियुग में कृष्णवर्ण की देवी व देवताओं की पूजा को अभीष्ट सिद्धिदायक बताया गया है क्योंकि कलियुग की अधिष्ठात्री महाशक्ति काली इसी वर्ण की हैं। कालिका पुराण में काली अवतार का वर्णन है। काली माता की आराधना करने से मन में सुरक्षा का भाव जागृत होता है। उनके स्मरण, अर्चना व पूजा से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। तंत्र शास्त्र की दस महाविद्याओं में काली को पहला स्थान दिया गया है। चूंकि काली की साधना के नियम बहुत कठोर हैं लेकिन जो लोग कठिन मंत्रों की साधना नहीं कर पाते, वे उनके नाम का जप करके मनोकामना पूरी कर सकते हैं। काली जयंती के दिन ही महिलाओं द्वारा जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु की कामना के साथ किया जाएगा।

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संतान के सभी कष्ट होते हैं दूर

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुण्य कर्मों को अर्जित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को जीवनदान दिया था। इसलिए यह व्रत संतान की रक्षा की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण संतान की रक्षा करते हैं। 

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