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जीवित्पुत्रिका पूजा: नहाय खाय के साथ रखा व्रत...कुंडों-तालाबों के पास महिलाओं ने डेढ़ घंटे तक सुनी कथा

Sun, 14 Sep 2025 04:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 14 Sep 2025 04:19 PM IST
सार

काशी में रविवार की शाम जीवित्पुत्रिका की पूजा के लिए महिलाएं तालाब-कुंडों के पास एकत्रित हुईं। यहां विधि-विधान से जीमूतवाहन का पूजन किया। बेटे की दीर्घायु के साथ सुख-समृद्धि की कामना की।

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Jivitputrika Puja Fasting was kept with Nahai Khay women reached near ponds and kunds did puja
खोजवां स्थित शंकुलधारा पोखरा पर पूजन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीवित्पुत्रिका व्रत शनिवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। तीन दिनों तक चलने वाले इस व्रत की परंपरा को निभाते हुए महिलाओं ने स्नान ध्यान कर सात्विक भोजन ग्रहण किया। रविवार को दिनभर निराजल व्रत रखकर जीमूतवाहन का विविधवत पूजन अर्चन कर पुत्र की दीर्घायु के साथ सुख-समृद्धि की कामना की। लक्सा लक्ष्मीकुंड पर लगे सोरहिया मेला का समापन हुआ। 

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अश्विन मास शुक्लपक्ष की सप्तमी यानी शनिवार को व्रत की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हुई थी। महिलाएं स्नान ध्यान कर बिना प्याज-लहसुन के सात्विक भोजन ग्रहण किया। पारिवारिक रीति-रिवाज के अनुसार व्रत शुरू करने के पूर्व यानी भोर में उड़द के साबूत दाने को महिलाएं निकलीं। इसके बाद अन्न व जल सब कुछ त्याग अष्टमी तिथि पर रविवार को दिन और रातभर कुछ भी ग्रहण नहीं किया। शाम को अपने आसपास के मंदिरों व कुंडों पर विधिवत भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर कथा का श्रवण करने पहुंच गईं। 

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कली सतपुतिया पांच रुपये पीस बिकी
जीवित्पुत्रिका व्रत रविवार को है। इसको लेकर शनिवार को लोगों ने पूजन सामग्री की खरीदारी की। अस्थायी दुकानों पर लोगों ने फल खरीदे। केला, नारियल, अनन्नास व खीरा 50 रुपये तो अन्य फल सौ रुपये के पार थे। कली वाली सतपुतिया पांच से 10 रुपये पीस दी तो नुनिया साग 200 रुपये किलो बिका। 

मां महालक्ष्मी का होगा 56 भोग शृंगार
लक्ष्मीकुंड स्थित महालक्ष्मी मंदिर में 16 दिवसीय अनुष्ठान मेला के समापन अवसर पर 16 सितंबर को महालक्ष्मी का भव्य 56 भोग शृंगार किया जाएगा। इसके साथ ही भजन संध्या भी आयोजित होगी। मां महालक्ष्मी के मंदिर को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान-मेवा से सजाया जाएगा। 

विभिन्न प्रकार के फूलों से मां का दरबार सजाया जाएगा। मंदिर के महंत पीठाधीश्वर शंकरपुरी महाराज ने बताया कि 16 दिवसीय अनुष्ठान के समापन पर दूसरों के शृंगार के अवसर पर सायंकाल गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में डॉ. अमलेश शुक्ला, अमन शैलबाला, यथार्थ दुबे, स्नेहा अवस्थी भजनों की प्रस्तुति देंगी। 

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