काशी विश्वनाथ मंदिर में जन्माष्टमी: श्रीकृष्ण के लिए मथुरा भेजे गए उपहार, टेंपल कनेक्ट पर जोर; समरसता का संदेश
काशी और मथुरा के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की परंपरा के तहत श्री काशी विश्वनाथ धाम से श्री लड्डू गोपाल के लिए विशेष भेंट तीन सितंबर को मथुरा भेजी गई। दो सितंबर को भेंट का पूजन किया गया था। अभियान के तहत देश-विदेश के 260 प्राण-प्रतिष्ठित देवी-देवताओं के शुभकामना संदेश भी मथुरा भेजे गए।
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सनातन संस्कृति के दो प्रमुख आस्था केंद्र काशी और मथुरा के बीच श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान मथुरा के लिए विशेष भेंट भेजी गई। तीन सितंबर को यह भेंट श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के लिए रवाना की गई।
इस धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा की शुरुआत वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर हुई थी। उस समय श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्री विश्वनाथ के माध्यम से श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा में विराजमान श्री लड्डू गोपाल के लिए उपहार भेजा गया था। इसके बाद रंगभरी एकादशी पर काशी से लड्डू गोपाल को और मथुरा से भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव को भेंट अर्पित करने की अभिनव परंपरा शुरू हुई।
इसी पावन श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी जन्माष्टमी पर दोनों तीर्थस्थलों के बीच भेंट का आदान-प्रदान किया गया। दो सितंबर को श्री लड्डू गोपाल के लिए तैयार विशेष उपहार सामग्री को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान विश्वेश्वर महादेव के समक्ष विधिवत पूजन-अर्चन के बाद अर्पित किया गया। भगवान विश्वेश्वर को भेंट का अवलोकन कराने के बाद तीन सितंबर को इसे मथुरा के लिए रवाना किया गया।
इस अभियान के तहत देश-विदेश के 260 प्राण-प्रतिष्ठित देवी-देवताओं के शुभकामना संदेश भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा को भेजे गए हैं। विभिन्न देवालयों और तीर्थस्थलों में विराजमान आराध्य स्वरूपों की ओर से प्राप्त मंगलकामनाओं को सनातन परंपरा की व्यापकता और आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक बताया गया।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से अपने संस्थागत ज्ञान सहयोगी ‘टेंपल कनेक्ट’ के सहयोग से यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश-विदेश के प्रमुख देवालयों और तीर्थस्थलों को आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ना तथा सनातन संस्कृति में संवाद, सहभागिता और परस्पर श्रद्धा को मजबूत करना है।
श्रीकृष्ण और भगवान शिव के प्रति साझा भक्ति की यह पहल काशी और मथुरा के बीच धार्मिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ सनातन संस्कृति में एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दे रही है।