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Varanasi News: 251 कलश के जल से हुआ गौरी केदारेश्वर का जलाभिषेक

Wed, 14 Aug 2024 07:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Aug 2024 07:21 PM IST
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Jalabhishek of Gauri Kedareshwar was done with water from 251 Kalash
- जलाभिषेक के साथ 117 वें करपात्र प्राकट्योत्सव की हुई पूर्णाहुति
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माई सिटी रिपोर्टर
वााराणसी। गौरी केदारेश्वर की जलाभिषेक यात्रा में हर-हर महादेव का जयकारा गूंज रहा था। 251 कलश के जलाभिषेक के साथ ही 117वें करपात्र प्राकट्योत्सव का समापन बुधवार को हो गया। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु हर-हर महादेव शंभू, काशी विश्वनाथ गंगे..., ऊं नमः शिवाय... का मंत्रोच्चार करते हुए चल रहे थे। श्रद्धालु केदार घाट पहुंचे।
बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ (मणि मंदिर) की ओर से चल रहे 15 दिवसीय महोत्सव के समापन पर सुबह 8:30 बजे धर्मसंघ परिसर से पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के सानिध्य में विशाल शोभायात्रा निकाली गई। डमरुओं की गड़गड़ाहट से गुंजित शोभायात्रा गुरुधाम, विजया तिराहे, भेलूपुर, सोनारपुरा होते हुए केदारघाट पहुंची। 251 कलशों से भक्तों ने गौरी केदारेश्वर का जलाभिषेक किया।
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धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के प्राकट्योत्सव पर निकली शोभायात्रा में सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा में सबसे आगे बटुक धर्मसंघ का बैनर लिए चल रहे थे। उनके साथ दंडी संन्यासियों का समूह चल रहा था। उसके पीछे फूलों से सुसज्जित वाहन पर करपात्री जी महाराज का भव्य चित्र रखा गया था। 21 डमरू वादकों का दल एक साथ डमरू बजाते हुए चल रहा था। उनके पीछे महिलाएं व पुरुष भक्त माथे पर कलश लिए चल रहे थे। सबसे पीछे धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज रथ पर विराजमान होकर चल रहे थे। केदार घाट पर पं. जगजीतन पांडेय के आचार्यत्व में 11 वैदिक आचार्यों ने गौरी केदारेश्वर का सर्वप्रथम षोडशोपचार विधि से पूजन किया। पहले शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने 21 लीटर दूध और गंगा जल से बाबा का अभिषेक किया। उसके बाद 251 कलशों के जल से केदार जी का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद धर्मसंघ पीठाधीश्वर व पं. जगजीतन पांडेय ने श्रद्धालुओं के साथ केदार घाट स्थित करपात्र धाम में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी की प्रतिमा सहित अन्य देव विग्रहों का विधिवत पूजन अर्चन किया।
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