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जैन मुनि आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने की मन की व्याख्या

Sat, 27 Feb 2021 12:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 12:58 AM IST
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jain sagar in varanasi
जैन मुनि आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य का मन अनुभूत है। मन हंसाता भी है, रुलाता भी है। मन की बाल्टी पर संतोष की पेंदी लगा दो तो शायद मन इतना परेशान नहीं होगा। वह शुक्रवार को श्री दिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में मंगल आशीर्वाद दे रहे थे।
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जैन मुनि ने कहा, यदि कोई पूछे मन क्या है तो यह अनुत्तरित है। मन का प्रश्न बहुत उलझा हुआ है। भविष्य में कब सुलझेगा पता नहीं। आज सब अपने मन से ही परेशान और अशांत हैं। मन को जहां लगाना चाहिए वहां तो लगता नहीं है और जहां नहीं लगाना है वहां से हटता नहीं है। बस मन की यही परेशानी सबके मन को परेशान कर रही है।
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इसके पूर्व जैन मुनि ने शुक्रवार को प्रात: जिनेंद्र प्रार्थना, दीपार्चना एवं शांति धारा संपन्न कराई। आहारचर्या के उपरांत पदयात्रा करते हुए भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्मस्थली भदैनी व नरिया स्थित जैन मंदिर में पहुंचे। उसके बाद अस्सी घाट पर सुबह ए बनारस के मंच से भक्तों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान दीपक जैन, राजेश जैन, अरुण जैन, आरसी जैन, सौरभ जैन, तरुण जैन व पं. कमलेश जैन मौजूद रहे।
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