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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Jai Maa Annapurna lakhs devotees visited on temple blessed after receiving Prasad in form of treasure

जय मां अन्नपूर्णा : पहले दिन 2.5 लाख, दूसरे दिन 1.5 लाख भक्तों ने किए दर्शन; खजाना रूपी प्रसाद पाकर हुए धन्य

Thu, 31 Oct 2024 09:38 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 31 Oct 2024 09:38 AM IST
सार

Varanasi News : काशी में मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन का खास विधान है। दीपावली पर हर वर्ष मंदिर के खजाने का वितरण प्रसाद के रुप में होता है, जिसे पाने के लिए दूरदराज से भक्त आते हैं। दर्शन-पूजन के बाद प्रसाद मिलता है। पांच दिन तक चलने वाले मां के दर्शन के लिए लाखों भक्त पहुंचते हैं।

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Jai Maa Annapurna lakhs devotees visited on temple blessed after receiving Prasad in form of treasure
अन्नपूर्णा मंदिर में सुरक्षा के बीच दर्शन-पूजन करते भक्त। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए दूसरे दिन 1.5 लाख भक्तों ने दर्शन किए। बीते मंगलवार को 2.5 लाेगों ने दर्शन किए थे। मां की एक झलक पाने को आतुर भक्त घंटों कतारबद्ध होकर इंतजार करते रहे। 

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मौका मिला तो मां को अपलक निहार निहाल हुए। मां के दर्शन और खजाना पाकर धन्य हुए। दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से भक्त पहुंचे थे। सुबह से रात तक दर्शन का सिलसिला चला। मंदिर के पट बंद होने तक डेढ़ लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
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साल में धनतेरस से पांच दिन तक ही मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन होते हैं। दूसरे दिन भी भक्तों की लंबी कतार रही। मां के स्वर्णमयी प्रतिमा के लोगों ने दर्शन किए। भक्त कतारबद्ध होकर बांसफाटक की तरफ से प्रवेश कर गेट नंबर एक (ढुंढिराज गणेश) से अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य द्वार मंदिर परिसर में पहुंच रहे थे। 

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Jai Maa Annapurna lakhs devotees visited on temple blessed after receiving Prasad in form of treasure
मंदिर परिसर में लगी भक्तों की कतार। - फोटो : अमर उजाला

मां के गूंजे जयकारे
इसके बाद मंदिर के प्रथम तल पर मां की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान भक्तों को मां के खजाने के सिक्के बांटे जा रहे थे। बाहर से ज्यादा भक्त दर्शन करने पहुंचे थे। महंत शंकर पुरी ने बताया कि चार बजे भोर में मां का सविधि पूजन कर आम भक्तों के लिए मंदिर का पट खोल दिए गए। मां के जयकारे गूंजते रहे। 

मां अन्नपूर्णा का नवरत्नों के हार से शृंगार : काशीपुराधिपति को अन्न-धन की भिक्षा देने वाली मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप में भक्तों ने दर्शन किए। माता गजफूल पर विराजमान थीं तो गले में नवरत्नों का हार धारण किया है। मां के स्वर्णमयी अन्नपूर्णा प्रतिमा का हीरे और नवरत्नों की माला से शृंगार हुआ। माता के नवरत्नों के हार माणिक्य, हीरा, पन्ना, नीलम, मोती, मूंगा, पुखराज, लहसुनिया और गोमेद जड़ा है। माता के कान में हकीक और हीरे के झुमके हैं। मां की नाक की नथनी हीरा जड़ित हैं। हाथ में नवरत्न के कंगन हैं। 

जलेंगे घी के दीप, लगेंगे मेवे और केसर की खीर के भोग
दीपावली पर गुरुवार को काशी के देवालय व शिवालय घी के दीपों से जगमग होंगे। मंदिरों के शिखर से लेकर गर्भगृह तक दीपों की लड़ियां सजेंगी। फल और मिष्ठान के साथ मेवे व केसर की खीर व सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। मां लक्ष्मी व मां दुर्गा स्वर्ण आभूषणों से सजेंगी।

दिवाली पर हर देवालय व शिवालयों में रातभर घी दीप जलाए जाएंगे। बाबा विश्वनाथ धाम में बाबा के पांचों वक्त की आरती व शृंगार के साथ ही गर्भगृह के अलावा धाम परिसर में सभी विग्रहों पर पांच या 11 दीप जलाए जाएंगे। मां अन्नपूर्णा के पांच दिवसीय स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के तहत बृहस्पतिवार को विशेष शृंगार कर विविध नैवेद्य अर्पित कर पूजन होगा। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मां का स्वर्ण आभूषण से शृंगार होगा। महानिशा पूजा होगी।

मां को मालपुए और हलवे का भोग लगेगा। वहीं, धर्मसंघ में स्थित मणि मंदिर में भी दीपों व विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट होगी। पंच हजारा जलाए जाएंगे तो पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराया जाएगा। इसके बाद मेवे, केसर की खीर और सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। 1008 श्रीसुक्त व कनक धारा का पाठ होगा। वहीं, बाबा कालभैरव मंदिर में भी दीप जलाने के साथ फूलों से शृंगार होगा। बाबा को मिठाई, फल, मेवे, मदिरा और भांग आदि का भोग लगेगा। 

भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की होगी पूजा: दीपावाली पर काशी में मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होगी। पंचगंगा घाट स्थित विंदु माधव मंदिर में सुबह से लेकर रात तक शृंगार व पूजन होगा। मक्खन, श्रीखंड, मलाई से शृंगार होगा। 

पूजा पंडालों में विराजीं मां काली आज होगी विशेष पूजा
दीपावली पर पूजा के लिए पूजा पंडालों में मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। बृहस्पतिवार को मां काली की निशा पूजा होगी। बंगीय समाज मां काली की विशेष पूजा की तैयारी में जुटा रहा। सोनारपुरा से लेकर शिवाला तक बंगीय समाज के पूजा पंडाल बने हैं।  दीपावली पर मां लक्ष्मी व श्रीगणेश जी के साथ मां काली की भी विशेष आराधना की जाती है। बंगीय समाज निशा पूजा होगी। 

बंगीय समाज के पूजा पंडालों में श्रद्धा व भक्ति के साथ मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। वाराणसी दुर्गाेत्सव समिलनी, काशी दुर्गाेत्सव, नवसंघ क्लब, वाराणसी संघ क्लब आदि पूजा पूडालों में प्रतिमाएं स्थापित हुईं। शहर के अन्य स्थानों पर भी पूजा पंडाल भी बने हैं। इसके अलावा देवनाथपुरा स्थित सर्वशिवा काली मंदिर, श्रीताराबाड़ी में भी विशेष पूजा होगी। दिवाली पर दिन रात में करीब नौ बजे के बाद रात तक करीब तीन बजे तक निशा पूजा होगी। 

ईश्वर के प्रति भक्ति, सामाजिक समृद्धि यज्ञ का मुख्य उद्देश्य
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दीपावली महोत्सव के उपलक्ष्य में महालक्ष्मी यज्ञ का शुभारंभ बुधवार को हुआ। इस दौरान कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यज्ञ में आहुति डालना परमात्मा को भोजन कराने जैसा है। इसमें सभी को भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यज्ञ एक श्रेष्ठतम कर्म है, जो साधकों का अपनी आत्मा की उन्नति और ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति की दिशा में मार्गदर्शन करता है। 

इसका उद्देश्य ईश्वर के प्रति भक्ति, आत्मा के शुद्धिकरण के साथ ही सामाजिक समृद्धि की प्राप्ति करना है। महालक्ष्मी महायज्ञ के संयोजक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि वेद विभाग की यज्ञशाला में 12 मार्च से अनवरत वर्ष पर्यंत चलने वाला चतुर्वेद महायज्ञ का बुधवार को 232वां दिन रहा। कार्यक्रम में वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रमेश प्रसाद, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. दुर्गेश पाठक डॉ. ज्ञानेंद्र सापकोटा आदि मौजूद रहे। 

नरक चतुर्दशी पर जलाए यम दीप, यमराज की पूजा
पंच दीपोत्सव के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली की पूजा हुई। लोगों ने घर के बाहर चार बातियों वाला यम दीप जलाया और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की। तिल के तेल से भरे दीपों का यम दीप घरों के अलावा मंदिरों, मठों, बाग-गीचे, गलियों में जलाए गए। जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती, अढ़ैया, महादशा, अंतरदशा, गोचर में शनि का प्रभाव वाले लोगों ने व्रत रखे। शाम को घरों के आगे यमदीप जलाए। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन पूजन-अर्चन से नरक की यात्रा से मुक्ति मिलती है और वह मृत्यु के बाद नरक में जाने से बच जाते हैं। यम पूजा से लोग अकाल मृत्यु से भी बच जाते हैं।

10 करोड़ की फूल मालाओं की हुई खरीदारी
दीपावली की खरीदारी के लिए फूल मंडियों में जबरदस्त भीड़ रही। पूर्वांचल के अलावा बाहर के कारोबारियों ने 10 करोड़ से अधिक रुपये के फूलों की माला खरीदी। 25 से 3200 रुपये सैकड़ा गेंदे की माला बिकी। बुधवार को पूर्वांचल के व्यापारी खरीदारी करने पहुंच थे। मंडी में भोर से लेकर रात तक खरीदारी भीड़ रही। उन्होंने मोलभाव कर गेंदे की माला व कमल के फूल खरीदे। इंग्लिशिया लाइन मंडी के कारोबारी संतोष पाल व ईश्वरचंद्र ने बताया कि ऑर्डर पर पूर्वांचल के अलावा चंडीगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार आदि प्रदेशों में फूलों की मालाएं भेजी गई हैं।

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