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Varanasi News: शिव की नगरी में गूंजा जय-जय गणपति महाराज
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काशी माघ कृष्ण चतुर्थी पर जय-जय गणपति महाराज के जयघोष से गूंज उठी। 56 विनायक का पूजन करके श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। बाबा विश्वनाथ के साथ ही गणपति भी जागे और शयन आरती तक दर्शन पूजन का सिलसिला अनवरत चलता रहा। प्रमुख गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के साथ ही हनुमान जी की पूजा हुई। लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव के साथ ही जय गणेश का जयकारा भी गूंजता रहा। दुर्गाकुंड स्थित श्री दुर्ग विनायक गणेश मंदिर में वार्षिक शृंगार महोत्सव हुआ। प्रथमेश को 21 क्विंटल प्रसाद का भोग लगाया गया। सुबह 5 बजे शृंगार के साथ मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। नौ बजे से 11 भूदेवों ने गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ किया। दूर्वा से गणेश सहस्त्रार्चन किया गया। अपराह्न एक बजे फलों एवं मोदक का भोग लगाया गया। सायंकाल दिव्य झांकी सजाई गई। स्वर्ण एवं रजत आभूषणों से विग्रह को अलंकृत कर दरबार सजाया गया। छप्पन भोग लगाकर विराट आरती उतारी गई। आयोजन महंत तारकेश्वर दुबे के सानिध्य में हुआ। आरती पंडित दीपक दुबे ने उतारी। ईशाक दुबे, निर्भय उपाध्याय, अशोक, अंकित व्यवस्था में लगे रहे।
महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, उतारी चंद्रमा की आरती
महिलाओं ने संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए व्रत रखा। रात 8.23 बजे चंद्रोदय के साथ ही अर्घ्य देकर चंद्रमा की आरती उतारी। कथा सुनने के बाद भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया गया। तिल का प्रसाद ग्रहण करने के बाद महिलाओं ने व्रत को पूर्ण किया।
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गऊ मठ में पूजे गए सिद्धिविनायक महाराज
वाराणसी। मणिकर्णिका गऊमठ स्थित प्राचीन श्री 1005 श्री सिद्धिविनायक महाराज के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। श्रद्धालुओं ने संतान सुख की कामना से विधिविधान से दर्शन पूजन किया। मंदिर के प्रबंधक गोपाल सुरेलिया व महंत राजेंद्र शर्मा (दीपू गुरु) ने वेद मंत्रों के बीच ब्रह्म मुहूर्त में श्री सिद्धिविनायक गणेश का पंचामृत स्नान कर रंग-बिरंगे फूलों से शृंगार किया। मोदक व लड्डू का भोग लगाकर महा आरती की गई। शाम को शास्त्रीय संगीत से पूरा मंदिर परिसर गणेश वंदना से गुंजायमान रहा। ब्यूरो
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संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के साथ ही हनुमान जी की पूजा हुई। लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव के साथ ही जय गणेश का जयकारा भी गूंजता रहा। दुर्गाकुंड स्थित श्री दुर्ग विनायक गणेश मंदिर में वार्षिक शृंगार महोत्सव हुआ। प्रथमेश को 21 क्विंटल प्रसाद का भोग लगाया गया। सुबह 5 बजे शृंगार के साथ मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। नौ बजे से 11 भूदेवों ने गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ किया। दूर्वा से गणेश सहस्त्रार्चन किया गया। अपराह्न एक बजे फलों एवं मोदक का भोग लगाया गया। सायंकाल दिव्य झांकी सजाई गई। स्वर्ण एवं रजत आभूषणों से विग्रह को अलंकृत कर दरबार सजाया गया। छप्पन भोग लगाकर विराट आरती उतारी गई। आयोजन महंत तारकेश्वर दुबे के सानिध्य में हुआ। आरती पंडित दीपक दुबे ने उतारी। ईशाक दुबे, निर्भय उपाध्याय, अशोक, अंकित व्यवस्था में लगे रहे।
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महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, उतारी चंद्रमा की आरती
महिलाओं ने संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए व्रत रखा। रात 8.23 बजे चंद्रोदय के साथ ही अर्घ्य देकर चंद्रमा की आरती उतारी। कथा सुनने के बाद भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया गया। तिल का प्रसाद ग्रहण करने के बाद महिलाओं ने व्रत को पूर्ण किया।
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गऊ मठ में पूजे गए सिद्धिविनायक महाराज
वाराणसी। मणिकर्णिका गऊमठ स्थित प्राचीन श्री 1005 श्री सिद्धिविनायक महाराज के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। श्रद्धालुओं ने संतान सुख की कामना से विधिविधान से दर्शन पूजन किया। मंदिर के प्रबंधक गोपाल सुरेलिया व महंत राजेंद्र शर्मा (दीपू गुरु) ने वेद मंत्रों के बीच ब्रह्म मुहूर्त में श्री सिद्धिविनायक गणेश का पंचामृत स्नान कर रंग-बिरंगे फूलों से शृंगार किया। मोदक व लड्डू का भोग लगाकर महा आरती की गई। शाम को शास्त्रीय संगीत से पूरा मंदिर परिसर गणेश वंदना से गुंजायमान रहा। ब्यूरो