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तालाब का पट्टा काशी विद्यापीठ को करना अनुचित
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भैरव तालाब स्थित प्रसिद्ध तथा ऐतिहासिक तालाब का पट्टा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा कराए जाने का मामला शांत नहीं हो रहा है। अधिवक्ता मनीष कुमार सिंह व पुष्पराज मौर्य ने उपजिलाधिकारी के समक्ष वाद प्रस्तुत कर कहा कि तालाब सरकार की जमीन है, इसलिए काशीराज को यह अधिकार नहीं था कि वे तालाब का पट्टा विद्यापीठ के नाम कर दें।
अधिवक्ताओं ने कहा कि विद्यापीठ को भी यह अधिकार नहीं था कि वह उक्त जमीन का कब्जा स्वीकर करें। अधिवक्ताओं ने अवैधानिक पट्टा निरस्त करने हेतु उपजिलाधिकारी के समक्ष शुक्रवार को वाद दाखिल किया। उपजिलाधिकारी राजातालाब ने वाद को स्वीकार कर लिया है। मामले में अगली तारीख चार अगस्त 2022 रखी गई है।
यह तालाब तहसील राजातालाब के जमीन शिवसागर गाव में 1.400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। सन 2005 में इस तालाब की भूमि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी को चिकित्सा विज्ञान संस्थान खोलने के लिए लीज पर दी गई थी। सरकारी तालाब का पट्टा करने और कराने के मामले को लेकर समाजसेवी व वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उपजिलाधिकारी के समक्ष वाद करके अधिवक्ता ने तालाब को सार्वजनिक उपयोगिता का बताया है।
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अधिवक्ताओं ने कहा कि विद्यापीठ को भी यह अधिकार नहीं था कि वह उक्त जमीन का कब्जा स्वीकर करें। अधिवक्ताओं ने अवैधानिक पट्टा निरस्त करने हेतु उपजिलाधिकारी के समक्ष शुक्रवार को वाद दाखिल किया। उपजिलाधिकारी राजातालाब ने वाद को स्वीकार कर लिया है। मामले में अगली तारीख चार अगस्त 2022 रखी गई है।
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यह तालाब तहसील राजातालाब के जमीन शिवसागर गाव में 1.400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। सन 2005 में इस तालाब की भूमि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी को चिकित्सा विज्ञान संस्थान खोलने के लिए लीज पर दी गई थी। सरकारी तालाब का पट्टा करने और कराने के मामले को लेकर समाजसेवी व वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उपजिलाधिकारी के समक्ष वाद करके अधिवक्ता ने तालाब को सार्वजनिक उपयोगिता का बताया है।
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