Varanasi News: विश्व चाय दिवस; इसमें में अनेक स्वाद, काशी में पारंपरिक से आधुनिक की ओर चर्चा की चुस्की
चाय हमारे आपके सभी की दिनचर्या से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि दिन की शुरूआत चाय से होती है और चर्चा भी चाय पर ही होती है। काशी में चाय का खास महत्व है। यहां तो राजनीति ही चाय पर निर्भर होती है। विश्व चाय दिवस पर काशी की चाय की खासियत और इसका अंदाज कितना निराला है हम आपके बताएंगे।
विस्तार
विश्व चाय दिवस पर दुनिया भर में चाय प्रेमियों ने अपने पसंदीदा पेय के प्रति अपना जुनून व्यक्त किया। हर साल 21 मई को मनाया जाता। सुबह की सुस्ती भगाने से लेकर शाम की थकावट मिटाने तक, या फिर दोस्तों के साथ गहन चर्चाओं का साक्षी बनने तक, चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक भावना है। काशी में चाय की संस्कृति काफी पुरानी है।
मसाला चाय, बनारसी हाजमोला चाय, और नींबू मसाला चाय तक सीमित नहीं रह गई है। अब एक चाय की पत्ती से कई प्रकार की स्वाद वाली चाय होटल, रेस्टूरेंट और अड़ियों पर पीने के लिए मिल रही है। बीते दस साल में चाय बेचने की भी परंपरा में काफी बदलवा हुआ है जिससे इसे पीने वालों की संख्या बढ़ी है।
काशी के कई नामी चाय विक्रेताओं का कहना है कि अब पारंपरिक तरीके चाय बेचना काफी कठिन हो गया है। लोगों को चाय पिलाने के लिए स्वाद में काफी बदलाव किया गया है। काशी में पारंपरिक दूध वाली चाय (मसाला चाय,अदरक, इलाइची वाली चाय) यह सबसे आम और लोकप्रिय प्रकार है।
इसमें दूध, चीनी, और अदरक या मसाले (इलायची, लौंग, काली मिर्च) का उपयोग होता है। काली चाय (ब्लैक टी) बिना दूध और चीनी के पी जाने वाली चाय है। नींबू चाय (लेमन टी) काली चाय में नींबू का रस मिलाकर बनाई जाती है, जो ताजगी देने वाली होती है।
ग्रीन टी (हरी चाय) स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में लोकप्रिय कई स्वादों में मिलती है। हर्बल चाय कई जड़ी-बूटियों (जैसे तुलसी, लेमनग्रास, पुदीना) से बनी चाय, अक्सर औषधीय गुणों के लिए पी जाती है। भास्कर चाय चूहड़मल की दुकान पर कभी बनाई जाने वाली यह विशिष्ट चाय, जिसमें लिप्टन ग्रीन लेबल का अर्क, नींबू और लवणभास्कर होता था।
आधुनिक कॉफी स्टाइल चाय अब काशी के कई कैफे और आधुनिक चाय की दुकानों पर कैप्पुचिनो, अमेरिकनो और एस्प्रेसो जैसी कॉफी बनाने की मशीनों से ही चाय भी तैयार की जाने लगी है, जिसमें एस्प्रेसो चाय या चाय लाटे शामिल हैं। स्पेशलिटी चाय दार्जिलिंग, असम, नीलगिरी जैसी विशेष क्षेत्रों से आने वाली चाय पत्ती से बनी चाय, जो अपने खास स्वाद के लिए जानी जाती हैं।
पुदीना चाय काली या हरी चाय में तासे पुदीने के पत्ते मिलाकर बनाई जाती है। गुलाबी चाय कश्मीर से प्रभावित यह चाय, जिसमें दूध और बेकिंग सोडा का उपयोग होता है जिससे इसका रंग गुलाबी हो जाता है, कुछ विशेष स्थानों पर मिल सकती है।
गुरुधाम स्थित 30 साल से चाय की दुकान चलाने वाले श्रीराम अग्रहरी ने बताया कि लोगों में चार पीने की ललक जगाने के चाय के स्वाद में कई बदलवा करने पड़ है। इस समय तंदूरी चाय मसाला, बटर चाय जैसे कई प्रकार से विकसीत हुई है जो लोगों को काफी पसंद आ रही है।
दस साल पहले जो चाय एक रुपये में बिकती थी अब वो दो से 200 रुपये तक हो गई है बावजूद इसके जाय पीने वालों में कमी नहीं आई है। प्रतिदिन सुबह छह बजे से लेकर रात आठ बजे तक एक क्विंटल तक दूध की जाय बिक जाती है। दस साल पहले यहीं चाय प्रतिदिन 25 से 50 लीटर तक ही सिमित रहती थी। अब बेचने के तरीके भी काफी बदलाव आया है। कोई पारंपरिक तरीके से तो बनाम चाय, एमबीए चाय, जैसे नामों से बेच रहा है।
कई राज्यों से आती है चाय
चाय व्यापारी दिनेश कुमार चौरसिया ने बताया कि मंडी में गुआहाटी सहित हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी की चाय अपनी विशिष्ट हरी और काली चाय के लिए जानी जाती है। उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल की बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी छोटे पैमाने पर चाय की खेती होती है।
तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियां यहां का प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र हैं। यहां की चाय सुगंधित और चमकदार होती है। केरल के चाय और कर्नाटक के चाय भी काशी में आते है जो अपने स्वाद और रंग के लिए मसहूर है। पहले असम से सप्ताह में डेढ़ हजार किलो चाय की आवक थी जो बढ़कर 3000 किलो हो गई है।