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इश्तियाक अहमद की बेबाक राय: गांधी ने मजहब का इस्तेमाल हिंदू-मुसलमान को करीब लाने और जिन्ना ने अलग करने को किया

Thu, 04 Apr 2024 12:12 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 04 Apr 2024 12:12 PM IST
सार

पाकिस्तानी मूल के स्वीडिश राजनीति शास्त्री प्रो. इश्तियाक अहमद ने अमर उजाला संवाददाता से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने मजहब का इस्तेमाल हिंदू-मुसलमान को करीब लाने और जिन्ना ने अलग करने के लिए किया। 

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Ishtiaq Ahmed Swedish political scientist of Pakistani origin opinion on Hindu Muslim religion
प्रो. इश्तियाक अहमद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तानी मूल के लेखक और स्वीडिश राजनीति शास्त्री प्रो. इश्तियाक अहमद ने कहा कि लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर खड़ा भारत दुनिया के लिए आदर्श है। महात्मा गांधी ने मजहब का इस्तेमाल हिंदू-मुसलमान को करीब लाने के लिए किया, लेकिन जिन्ना ने मजहब का इस्तेमाल उन्हें अलग करने के लिए किया। जिन्ना का प्रयास नकारात्मक था। गांधी के मजहब का इस्तेमाल उच्च मूल्यों पर आधारित थे। हिंदुस्तान से बदले की आग में पाकिस्तान ने खुद को बर्बाद कर लिया है।

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बीएचयू के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए प्रो इश्तियाक ने बुधवार को अमर उजाला संवाददाता से विशेष बात की और कहा कि लोग कहेंगे कि जिन्ना ने मुसलमानों को एक किया, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने मुसलमानों को भी एक नहीं रखा। विभाजन के दौरान एक तिहाई मुसलमान भारत में छोड़ गए। 
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मोहम्मद अली जिन्ना का देश पाकिस्तान अब बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है। वहां रोजगार नहीं है। न उद्योग और न ही कृषि। भारत से बदले की आग में उसने न तो शिक्षा पर ध्यान दिया और न ही आम नागरिकों के अधिकारों पर। भारत के साथ रिश्ते सुधारने और लाइन आफ कंट्रोल को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर बनाने से ही पाकिस्तान के हालत सुधरेंगे।

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की जा रही है। इस पर आप क्या कहेंगे?

पाकिस्तान छोड़ने के चक्कर में 400 लोग समुद्र में डूबकर मर गए। लोग दुनिया भर से हिंदुस्तान आ रहे हैं। लोकतांत्रिक देश की खूबसूरती है कि कानूनी रूप से कमजोर और मजबूत के साथ एक समान व्यवहार हो। भारत में आरक्षण के कारण ही पिछड़े और दलित आगे आए। उनका विकास हुआ। अगर हिंदू मायथोलॉजी होती तो दलित को तो वोट देने का अधिकार ही नहीं होता। ब्राह्मण के पास तो हजार वोट हो सकते थे। आपने तो इन चीजों से आजाद होकर जो हिंदुस्तान कायम किया है, उसे ही कायम रखें।

आजादी के बाद हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर क्या कहेंगे?
जवाब- बांग्लादेश ने तो अपना तेजी से विकास किया है। उसने भारत के साथ भी व्यापारिक रिश्ते रखे। बदला लेने की आग में पाकिस्तान ने खुद को बर्बाद कर लिया। भारत का कोई नुकसान नहीं हुआ।

पाकिस्तान के भविष्य के बारे में क्या कहना है आपका?
पाकिस्तान का भविष्य कल सही हो सकता है अगर वह एक नार्मल स्टेट हो जाए। और वह बजाय कट्टरवादी को प्रमोट करने के लोकतंत्र और नागरिकों तथा अल्पसंख्यक जनता के अधिकार को तवज्जो दे।

दोनों देशों के अवाम के दिल में क्या है?
हिंदुस्तानी के दिल में पाकिस्तानी और पाकिस्तानियों के दिल में हिंदुस्तानी रहता है। दोनों देश के नागरिकों का अगर डीएनए टेस्ट कराया जाए तो काफी समानताएं मिलेंगी। विज्ञान भी इसको सिद्ध करता है। नफरतें राजनीतिक रूप से लोगों में भरी गईं और उसका ही नतीजा था कि एक मिलियन से ज्यादा लोग मारे गए।
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