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वरुणा पर कब्जाः सिंचाई विभाग ने झाड़ा पल्ला, राजस्व और नगर निगम बन गए दीवार

Fri, 02 Jun 2017 12:52 PM IST
amarujala.com- Written by:गुंजन श्रीवास्तव
amarujala.com- Written by:गुंजन श्रीवास्तव Updated Fri, 02 Jun 2017 12:52 PM IST
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 Irrigation Department refuse from varuna corridor encrochment
वरुणा के डूब क्षेत्र में में बन गई बांउड्री - फोटो : अमर उजाला
वरुणा कॉरिडोर के लिए डूब क्षेत्र के सीमांकन के समय सिंचाई विभाग ने तलहटी पाटकर बनाई गई बांउड्री पर आपत्ति जताई तो राजस्व और नगर निगम दीवार बनकर खड़े हो गए। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि तलहटी में बनी बांउड्री पर उनकी आपत्ति सिरे से खारिज दी गई थी।
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उत्तरी भारत नहर और जल निकास अधिनियम- 1873 के अनुसार, प्राकृतिक जल बहाव में बाधक बनने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सिंचाई विभाग को भी है। इसके तहत विभाग ने 130 लोगों को अवैध निर्माण पर नोटिस दिया और उसकी सूची प्रशासन को भी सौंपी लेकिन उसके बाद एक कब्जा नहीं हटा।
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सिंचाई विभाग ने कदम नहीं बढ़ाए और सब कुछ जानकारी में होने के बाद भी प्रशासन बेखबर बना रहा। इससे कब्जा करने वालों का मनोबल और बढ़ गया।  विभागीय सूत्रों की मानें तो जिस समय वरुणा कॉरिडोर के लिए सर्वे कराया जा रहा था, उस दौरान डीएम आवास के पीछे दूसरे किनारे भीमनगर में तलहटी में बनी बाउंड्री पर सवाल उठा था।
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तब राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों ने दस्तावेज के अनुसार बाउंड्री को वैध बताया था, जबकि सिंचाई विभाग ने तलहटी में उसके निर्माण पर आपत्ति की थी। हालांकि दस्तावेज में दर्ज रिकार्ड के चलते सिंचाई विभाग को पीछे हटना पड़ा।  

कॉरिडोर निर्माण से पहले डूब क्षेत्र के सीमांकन के लिए राजस्व, नगर निगम और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम बनी थी। उस दौरान भी मनमाने तरीके  से पिलर गाड़ने को लेकर सिंचाई विभाग ने आपत्ति की थी लेकिन राजस्व और नगर निगम ने अपने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए एक नहीं सुनी।

फिर पिलर से नदी तक जहां जितनी जगह उपलब्ध हुई, वहां उतने में ही कॉरिडोर का काम हुआ। 

डीएम होते हैं नदी किनारे की जमीनों के मालिक

 Irrigation Department refuse from varuna corridor encrochment
मिट्टी से पाटा गया वरुणा नदी का जलभराव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला

मुख्य अभियंता (सोन) सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि हर वर्ष नदी की वस्तुस्थिति के बारे में लगातार जिला प्रशासन को सूचना भेजी जाती है। नदी राज्य सरकार की संपत्ति होती है। नदी किनारे की जमीनों के मालिक जिलाधिकारी होते हैं।

1978 में आई बाढ़ के उच्चतम बिंदु के अनुसार हाई फ्लड लेवल (एचएफएल) के दायरे को डूब क्षेत्र घोषित किया गया है। इसका विवरण प्रशासन को भी उपलब्ध कराया जा चुका है। यह भी हिदायत दी जाती है कि इस दायरे में कोई पक्का निर्माण न कराने पाए।

यदि कोई पक्का निर्माण कराता है तो उसे ढहाने की कार्रवाई जिला प्रशासन की ओर से की जाती है। सिंचाई विभाग ऐसी कोई कार्रवाई तभी करता है जब जिला प्रशासन निर्देश दे। वैसे भी शहरी इलाकों में अवैध कब्जा नगर निगम और वीडीए हटवाता है। 


मार्च से जून तक वरुणा नदी का डिस्चार्ज शून्य 
इलाहाबाद के फूलपुर तहसील स्थित मैलहन गांव से निकलकर 148 किमी की दूरी तय कर वरुणा वाराणसी के आदिकेशव घाट पर आकर गंगा में मिल जाती हैं। इसमें बीच-बीच में कई प्राकृतिक नाले मिलते हैं। वरुणा में केवल वर्षा काल में पानी उपलब्ध रहता है। मार्च, अप्रैल, मई, जून में नदी का डिस्चार्ज शून्य होता है। समय समय पर ज्ञानपुर पंप कैनाल से इसमें गंगा का पानी छोड़ा जाता है। 
 
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