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काशी में खुलेगा अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र
वाराणसी, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Dec 2014 02:12 AM IST
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने काशी में संस्कृत और हिंदी की
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शिक्षा के लिए एक विश्वस्तरीय केंद्र खोलने का फैसला किया है। मानव संसाधन
विकास मंत्रालय ने यूजीसी के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय के
सहयोग से बनने वाले इस अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र (आईयूसी) के खुलने के
साथ ही दुनिया में हिंदी और संस्कृत के विद्वानों की कमी दूर हो जाएगी।
प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार 25 दिसंबर को काशी आ रहे मोदी इस
केंद्र की आधारशिला रखेंगे।
अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र बीएचयू की देखरेख में संचालित होगा। बीएचयू के कमच्छा स्थित शिक्षा संकाय के परिसर में इसका नया भवन बनेगा। काशी में खुल रहा संस्कृत शिक्षा का यह एक विश्वस्तरीय केंद्र होगा। यहां संस्कृत और हिंदी की पढ़ाई के साथ ही शोध की भी व्यवस्था होगी। संस्कृत साहित्य से जुड़ी मेधा को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ही काशी में यह केंद्र खोला जा रहा है।
केंद्र की मदद से संस्कृत और हिंदी के शिक्षकों की नई पौध तैयार होगी। साथ ही शोध के नए आयाम भी खुलेंगे। काशी में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बड़ी भूमिका है। संघ से जुड़े एक वरिष्ठ स्वयंसेवक ने कहा कि हमारे इतिहासकार और शोध छात्र अब तक स्वतंत्र रूप से दुनिया में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए जो काम कर रहे थे, जल्द ही वह काम अब काशी से होगा।
अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र को संस्कृत शिक्षा का विश्वस्तरीय केंद्र बनाया जाएगा। यह केंद्र सभी आधुनिकतम सुविधाआें और उपकरणों से सुसज्जित होगा। यूजीसी के चेयरमैन वेद प्रकाश ने बताया कि एक साल के अंदर आईयूसी का पूरा सेटअप तैयार हो जाएगा। संस्कृत के संवर्धन के लिए केंद्र की सरकार बेहद गंभीर है। इसी क्रम में इस केंद्र की स्थापना की जा रही है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी में इस केंद्र को खोलने की पहल की गई है।
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अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र बीएचयू की देखरेख में संचालित होगा। बीएचयू के कमच्छा स्थित शिक्षा संकाय के परिसर में इसका नया भवन बनेगा। काशी में खुल रहा संस्कृत शिक्षा का यह एक विश्वस्तरीय केंद्र होगा। यहां संस्कृत और हिंदी की पढ़ाई के साथ ही शोध की भी व्यवस्था होगी। संस्कृत साहित्य से जुड़ी मेधा को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ही काशी में यह केंद्र खोला जा रहा है।
केंद्र की मदद से संस्कृत और हिंदी के शिक्षकों की नई पौध तैयार होगी। साथ ही शोध के नए आयाम भी खुलेंगे। काशी में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बड़ी भूमिका है। संघ से जुड़े एक वरिष्ठ स्वयंसेवक ने कहा कि हमारे इतिहासकार और शोध छात्र अब तक स्वतंत्र रूप से दुनिया में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए जो काम कर रहे थे, जल्द ही वह काम अब काशी से होगा।
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अंतर विश्वविद्यालयीय केंद्र को संस्कृत शिक्षा का विश्वस्तरीय केंद्र बनाया जाएगा। यह केंद्र सभी आधुनिकतम सुविधाआें और उपकरणों से सुसज्जित होगा। यूजीसी के चेयरमैन वेद प्रकाश ने बताया कि एक साल के अंदर आईयूसी का पूरा सेटअप तैयार हो जाएगा। संस्कृत के संवर्धन के लिए केंद्र की सरकार बेहद गंभीर है। इसी क्रम में इस केंद्र की स्थापना की जा रही है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी में इस केंद्र को खोलने की पहल की गई है।
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