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International Museum Day: सारनाथ में है देश का सबसे पुराना संग्रहालय, मौजूद हैं 6832 मूर्तियां

Sat, 18 May 2024 06:22 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 18 May 2024 06:22 PM IST
सार

वाराणसी जिले के सारनाथ में देश का सबसे पुराना संग्रहालय है। इस संग्रहालय का नक्शा अंग्रेजी वास्तुकार ने तैयार किया था। 1910 में संग्रहालय बनकर तैयार हुआ था। यहां 6832 मूर्तियां दर्शनीय हैं। 

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International Museum Day 2024 country oldest museum upadesh sthal Sarnath in Varanasi
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का संग्रहालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व के प्राचीनतम शहर बनारस की हर बात अनोखी है। घाट, गलियों और मंदिरों के इस शहर को देखने के लिए देश ही नहीं सात समंदर पार से भी सैलानी आते हैं। देश का सबसे पुराना संग्रहालय तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ में है। अंग्रेजों ने इसका निर्माण कराया था और इस संग्रहालय में पर्यटकों के लिए 6832 मूर्तियां और कलाकृतियां हैं।

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संग्रहालय का निर्माण पुरातत्व के तत्कालीन महानिदेशक सर जॉन मार्शल की पहल पर 1904 में सारनाथ में संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया गया। वास्तुकार जेम्स रैमसन ने संग्रहालय का नक्शा तैयार किया था और यह 1910 में बनकर तैयार हुई। संग्रहालय में पांच दीर्घाएं और दो बरामदों में तीसरी शताब्दी से ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी इस्वीं तक की प्राचीन वस्तुएं प्रदर्शित हैं। 
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संग्रहालय की पूरी इमारत बलुआ पत्थर से बनी हुई है। संग्रहालय में सारनाथ में उत्खनन से प्राप्त सभी कलाकृतियों को संजो रखा गया है। संग्रहालय में प्रवेश मुख्य कक्ष से होता है इसके मध्य में हमारे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर भारत का राष्ट्रीय चिन्ह सिंह शीर्ष प्रदर्शित है। मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित यह सिंह शीर्ष मौर्य कालीन राज्य कला का प्रतीक है।

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ये कलाकृतियां हैं मौजूद

बोधिसत्व, नीलकंठ लोकेश्वर, पद्मपाणी, बुद्ध का जीवन चक्र, बौद्धदेवियां, अपराजिता, मारीचि, बौद्ध के अष्टम स्थान को उत्कीर्ण करता पट प्रदर्शित है, बुद्ध धर्मचक्रप्रवर्तन मुद्रा, शिव, विष्णु,गणेश, कार्तिकेय, भैरव,अग्नि पार्वती, नवग्रह, सहित अन्य कलाकृतियों को देखकर अपने इतिहास के वैभवशाली गौरव को यहां आए पर्यटक बखूबी महसूस कर सकते हैं।
 
अमेरिकी विंटेज कारों और शाही पालकियों का है संग्रह
रामनगर किले का संग्रहालय 17वीं सदी का एक महल हुआ करता था। पांच दीर्घाओं में बंटे हुए संग्रहालय की शुरुआत अमेरिकी विंटेज कारों और शाही पालकियों से होती है। इसके बाद राजसी वस्त्रों की गैलरी है। इसके अलावा पुरानी बंदूकें, संरचनाएं, दरबार हॉल, भूगोल वास्तुकला, बड़ी खगोलीय घड़ी, पुरानी कारें, नक्काशीदार छज्जे, संग्रह, इतिहास, बैगी, मंडप, घड़ियां, हथियार, प्राचीन वस्तुएं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

भारत के इतिहास को समेटे है भारत कला भवन

बीएचयू में स्थित भारत कला भवन की शुरुआत 1920 में गोदौलिया से भारत कला परिषद के रूप में हुई थी। इस संग्रहालय में भारत के संपूर्ण इतिहास के दर्शन होते हैं। संग्रहालय में कलाकृतियों, बौद्ध और हिंदू मूर्तियों, चित्रों, पांडुलिपियों, मुगल लघुचित्रों, चित्रों, ब्रोकेड वस्त्रों, एक समकालीन कला रूप और 15वीं शताब्दी की कांस्य मूर्तियों का संग्रह है। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर दो मंजिलों पर एक अस्थायी प्रदर्शनी स्थल है। इसके अलावा फ्रेड पिन गैलरी, टेराकोटा, खजाने, गैलरी, निकोलस रोरिक और कपड़े भी हैं।
 
विश्व संग्रहालय दिवस पर प्रवेश रहेगा निशुल्क
सारनाथ। भगवान बुद्ध के प्रथम धर्म उपदेश स्थली पर स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का संग्रहालय 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस पर यहां आने वाले पर्यटकों के लिए संग्रहालय के लिए प्रवेश निशुल्क रखेगा। संग्रहालय में प्रवेश के लिए यहां आने वाले पर्यटकों को पांच रुपये का प्रवेश शुल्क अदा करना पड़ता है। संग्रहालय खुलने का समय सुबह 9:00 बजे और बंद होने का समय 4:45 रखा गया है।

काशी की सैर कराता है मान महल आभासी संग्रहालय

काशी के गंगा तट पर स्थित मान महल का वर्चुअल म्यूजियम काशी की कला, धर्म और संस्कृति से रूबरू कराता है। भवन की दीवारों को इस तरह से तैयार किया गया है, ताकि प्रोजेक्टर के माध्यम से उन पर काशी की धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को दिखाया जा सके। म्यूजियम में काशी के घाट, मंदिर, गलियां, राम नगर की रामलीला, नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसी घाट की नाग नथैया, साड़ी बुनने की कला, काष्ठ कला और गंगा आरती को भी दर्शाया गया है।
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