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वाराणसी: पुलिस की मनमानी, दरोगा ने आरोपी की जगह एक बेकसूर को भेज दिया जेल

Fri, 28 Feb 2020 05:21 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 28 Feb 2020 05:21 PM IST
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Inspector sent an innocent to jail in place of accused in dashashwamedh varanasi
कैदी

पुलिस अपनी अजब-गजब करतूतों से हमेशा सुर्खियों में रहती है। ताजातरीन मामला दशाश्वमेध थाने की पुलिस से जुड़ा है। दशाश्वमेध थाने के एक दरोगा ने एक मुकदमे में वांछित पंकज तिवारी की जगह बेकसूर पंकज तिवारी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।

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पुलिस की करतूत का भंडाफोड़ होने पर अदालत ने जेल भेजे गए पंकज को बाइज्जत रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही पुलिस के इस कृत्य को घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता बताते हुए दशाश्वमेध थाने के दरोगा अखिलेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
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उधर, टायफाइड से पीडि़त पंकज पुलिस की प्रताड़ना और जेल भेजे जाने से अवसादग्रस्त हो गए हैं। पंकज का उपचार बीएचयू अस्पताल के मनोचिकित्सक कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद पंकज खुद को एक कमरे में कैद कर सिर्फ रो रहे हैं। परिजनों का कहना है कि पंकज की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षति की भरपाई कौन करेगा।

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दशाश्वमेध क्षेत्र की भूतेश्वर गली निवासी पंकज तिवारी पुत्र विश्वनाथ तिवारी के खिलाफ 2001 में गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। 2018 में पंकज के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार पंकज की मौत हो चुकी है। अगस्तकुंडा निवासी मोहन तिवारी ने बताया कि बीती 24 फरवरी को दरोगा अखिलेश वर्मा और दीवान सतीश चंद्र यादव उनके भतीजे पंकज तिवारी पुत्र स्वर्गीय बच्चेलाल तिवारी को दशाश्वमेध चौकी पर बुलाए। दोनों ने पंकज से कहा कि उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट है।

पंकज ने बताया कि आज तक वह कभी किसी पचड़े में पड़े ही नहीं तो मुकदमा कहां से दर्ज होगा। इसके साथ ही पंकज अपना आधार कार्ड दिखाया। इसके बावजूद पुलिस ने उनके पिता के नाम व पते पर ध्यान नहीं दिया और अदालत में पेश कर दिया। अदालत ने पंकज को जेल भेज दिया। 25 फरवरी को एसीजेएम कोर्ट के सामने अधिवक्ता विशाल सेठ ने पंकज के आधार कार्ड सहित अन्य कागजात प्रस्तुत किए तो अदालत ने उन्हें बाइज्जत रिहा करने का आदेश दिया।

बहू दुधमुंहे बच्चे को ले गई तो मांगा 10 हजार
पंकज के चाचा मोहन तिवारी ने बताया कि उनका भतीजा चौकी पर गया और काफी देर तक नहीं लौटा। इससे परेशान होकर उनकी बहू दुधमुंहे बच्चे को लेकर दशाश्वमेध चौकी पर गई। बहू ने आधार कार्ड दिखाते हुए बताया कि पंकज की तबीयत ठीक नहीं है तो दीवान सतीशचंद्र यादव ने 10 हजार रुपये के बदले में मामले को रफादफा करने को कहा। बहू ने पैसे न होने की बात कही तो दीवान ने कहा कि कुछ नहीं हो पाएगा।

हाईकोर्ट में लगाएंगे न्याय की गुहार
मोहन के अनुसार, उन्होंने अपने अधिवक्ता से बात की है। वह इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और हाईकोर्ट की शरण में जाने के साथ ही प्रदेश सरकार को भी चिट्ठी लिखेंगे। आखिरकार पुलिस किसी बेकसूर को कैसे जेल भेज सकती है। ऐसी अंधेरगर्दी होगी तो किसी को भी पकड़ कर पुलिस जेल भेज देगी।

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि प्रकरण की जानकारी मिलने पर जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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