फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Independence day special sixty two people of family sacrificed

स्वतंत्रता दिवस विशेष: परिवार के 62 रणबांकुरों ने दी कुर्बानी, अंग्रेजों की सत्ता नहीं स्वीकारी

Wed, 15 Aug 2018 10:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर Updated Wed, 15 Aug 2018 10:17 AM IST
विज्ञापन
Independence day special sixty two people of family sacrificed
खान बहादुर खान - फोटो : self
रुहेलखंड के शासकों के परिवार ने लगातार अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। स्वाधीनता संग्राम में जौनपुर जिले के मानी कला गांव के सेनानी जहूर अहमद और उनके परिवार ने संघर्ष की अलग मिसाल कायम की। सन 1857 से लगाया 1942 तक इस परिवार के लोग लगातार गुलामी के खिलाफ लड़ते रहे।
विज्ञापन


आजादी की जंग में इस परिवार के 62 रणबांकुरों ने कुर्बानी दी। परिवार के लोग रुहेल शासकों के नाम से प्रसिद्ध नवाब परिवार के लोगों ने कभी अंग्रेजों की सत्ता को दिल से स्वीकार नहीं किया। नवाब सिराजुद्दौला की पराजय के बाद रुहेल शासकों ने जंग-ए-आजादी को आगे बढ़ाया था। पहले कंपनी और फिर ब्रितानी हुकुमत ने रुहेल शासकों को की भरपूर कोशिश की लेकिन नवाब परिवार के लोग लगातार लड़ते रहे, कभी हार नहीं मानी।
विज्ञापन


नवाब हाफिजुलमुल्क हाफिज रहमत खां, नवाब जुल्फेकार खां, खान बहादुर खान, मलिका चांदनी, नवाब अलहाज सरजस्टिस अब्दुर्रहमान, नवाब अल्हाज अब्दुल करीम, जमींदार मानीराजा, नवाब जहूर अहमद जैसे परिवार के योद्धाओं ने आजादी के लिए सैकड़ों अंग्रेजों को मौत के घाट उतारा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनकी बदौलत अंग्रेजों के पैर कभी रुहेलखंड की जमीन पर नहीं जम सके। अंग्रेज शासकों की प्रताड़ना बचने के लिए इस कुनबे के नवाब अब्दुल रहमान व अब्दुल करीम जौनपुर के मानी कला में आकर बस गए।

24 मार्च 1877 को महारानी मलिका विक्टोरिया कैसरे हिंदुस्तान और उसके गवर्नर जनरल लिटन अव्वल ने खान बहादुर खान के पुत्र नवाब अब्दुर्रहमान व अब्दुल करीम को रुहेलखंड का फिर से नवाब घोषित कर दिया और समझौते का प्रस्ताव दिया। मगर नवाबों ने उसे ठुकरा दिया और जंग जारी रखी। 

एडवीना माउंटबेटन ने भी इस परिवार को लिखा है पत्र  

Independence day special sixty two people of family sacrificed
एडवीना माउंटबेटन - फोटो : self
अंत में लार्ड लिनलिथगो व लार्ड माउंटबेटन उसकी पत्नी एडवीना माउंटबेटन को उनकी बहादुरी को सलाम करना पड़ा। शहीद नवाब हाफिज रहमत खां की पांचवीं पीढ़ी के सदस्य स्वतंत्रता संग्राम के नायक नवाब जहूर अहमद अंसारी रुहेला को पत्र भेज कर उन्होंने माफी मांगी थी। लिनलिथगो ने ऐसा पत्र 5 अक्तूबर 1941 को लिखा था और हुकूमत के खिलाफ जंग बंद करने की गुजारिश की थी।

उधर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, एडवीना माउंटबेटन ने इस परिवार को अलग-अलग तारीखों में पत्र लिख कर उनकी बहादुरी की तारीफ की। सभी पत्रों को मानी कला में रह रहे इस शाही परिवार के वंशजों ने सहेज कर रखा है।

एडवीना ने 14 अगस्त 1947 को लिखे पत्र में कहा है कि आप जंग-ए-आजादी के अजीम रहनुमा हैं। आप जैसा साफ दिल इंसान हमने नहीं देखा। नवाब जहूर अहमद अंसारी रुहेला के पुत्र नवाब डा. मोहम्मद आशिक अंसारी रुहेला ने 2011 में चिरागे आलम मुताअल्लिका नवाब रुहेलखंड नाम से 835 पेज में इतिहास अपने परिवार के इतिहास को समेटा। यह किताब रामपुर रजा लाइब्रेरी में संरक्षित है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed