{"_id":"5f91dba18ebc3e5fa3001080","slug":"incrochment-city-news-vns554401225","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण और अतिक्रमण ने समाप्त कर दिया असि का वजूद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण और अतिक्रमण ने समाप्त कर दिया असि का वजूद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। असि नदी नहीं नाला कहिए। जिस असि नदी का वर्णन पुराणों में मिलता है। जिसके नाम से वाराणसी की पहचान है वो नाले में तब्दील हो चुकी है। यहां तक कि नगर निगम के दस्तावेजों में भी यह नाला ही दर्ज है। कंदवा से अस्सी घाट तक असि नदी का अस्तित्व है लेकिन सरकारी मशीनरी की अनदेखी के चलते नदी के दोनों छोर पर अवैध निर्माणों की शृंखला बनती चली गई। वीडीए और नगर निगम केजिम्मेदार अधिकार सोते रहे और अवैध निर्माणों में आलीशान मकान ही नहीं, स्कूल, शॉपिंग कॉप्लेक्स और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग भी खड़ी हो गई हैं। इसकी वजह से काशी के लोगों की आस्था से जुड़ी 200 फीट चौड़ी असि नदी अब आठ फ ीट के नाले में तब्दील हो चुकी है। चार दशक पहले जिस नदी के पानी से लोग आचमन करते थेए वर्तमान में वहां से गुजरना भी मुश्किल है। गंगा के दक्षिणी मोड़ पर मिलने वाली असि नदी को अब नदी मान ही नहीं सकते हैं। गंगा के जलस्तर में गिरावट ने असि नदी को नाला बना दिया। असि बचाओ समिति के गणेश शंकर का कहना है कि असि वो नदी है जिसका जिक्र पुराणों में भी मिलता है लेकिन आज खुद के अस्तित्व के लिए लड़ रही है। असि नदी के आठ किमी क्षेत्र में कूड़ा पाटकर कई घर बन चुके हैं। बीएचयू के नदी विज्ञानी
प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि असि नदी का अपना मौलिक जल, गुण, मात्रा और आवेग हुआ करता था। यह नगर के भूमिगत जल स्तर को संतुलित करने के साथ ही गंगा के कटान क्षेत्र में बंधा का काम करता था। ये नदियां अपने द्वारा लाई गई मिट्टी को गंगा के कटाव वाले क्षेत्रों में भर कर उसे स्थिरता प्रदान करती हैं।
सिमटती चली गई नदी
असि नदी का उद्गम स्थल कंदवा है। वहां से चितईपुर, करौंदी, करमजीतपुर, नेवादा, सरायनंदन, नरिया, साकेत नगर नगवां से गुजरते हुए गंगा में मिलती है। एक समय उद्गम स्थल से गंगा संगम तक नदी की चौड़ाई 200 फीट थी। वर्तमान में कंदवा उद्गम स्थल पर नदी का व्यास 30 फीट है। आगे बढ़ने के साथ चौड़ाई कम होती जाती है। नरिया से संकटमोचन मंदिर के पास वह नाले के रूप में आठ फी तक सिमट कर रह गई है।
विज्ञापन
पुराणों में नदी का वर्णन
असि नदी कंदवा स्थित कर्दमेेश्वर महादेव कुंड से शुरू होकर लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद गंगा में मिलती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 14 वर्ग किलोमीटर के दायरे में है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा ने शुंभ-निशुंभ नामक असुरों का वध करने के बाद जहां अपनी तलवार फेंकी थी, उस स्थान पर ही महादेव कुंड बना और इससे निकले पानी से ही असि नदी का उद्गम हुआ। असि नदी और अस्सी घाट का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास की मृत्यु में भी मिलता है।
-10 हजार अवैध निर्माण हो चुके हैं असि के किनारे
-3 लाख की आबादी रहती है इन अवैध निर्माण में
-14 वर्ग किलोमीटर है नदी का जल.ग्रहण क्षेत्र
-30 फीट चौड़ाई है नदी के उद्गम स्थल के पास
कब्जे
-नदी के किनारों को पाट कर छोटे से लेकर कई मंजिला तक आलीशान मकान बन गए हैं।
-असि नदी पर अतिक्रमण करने वाले कई स्कूल भी हैं। साकेत नगर में एक स्कूल ने तो दोनों किनारों पर निर्माण करके उन्हें पुल से जोड़ दिया है।
-शॉपिंग कॉप्लेक्स भी बना दिए गए हैं नदी पर अतिक्रमण करके।
-नाले में तब्दील हो चुकी नदी के किनारे पर कई रेस्टोरेंट भी आबाद हैं
-अतिक्रमण को बकरार रखने के लिए अतिक्रमणकारियों ने कुछ मंदिर भी बना दिए हैं
विज्ञापन
प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि असि नदी का अपना मौलिक जल, गुण, मात्रा और आवेग हुआ करता था। यह नगर के भूमिगत जल स्तर को संतुलित करने के साथ ही गंगा के कटान क्षेत्र में बंधा का काम करता था। ये नदियां अपने द्वारा लाई गई मिट्टी को गंगा के कटाव वाले क्षेत्रों में भर कर उसे स्थिरता प्रदान करती हैं।
विज्ञापन
सिमटती चली गई नदी
असि नदी का उद्गम स्थल कंदवा है। वहां से चितईपुर, करौंदी, करमजीतपुर, नेवादा, सरायनंदन, नरिया, साकेत नगर नगवां से गुजरते हुए गंगा में मिलती है। एक समय उद्गम स्थल से गंगा संगम तक नदी की चौड़ाई 200 फीट थी। वर्तमान में कंदवा उद्गम स्थल पर नदी का व्यास 30 फीट है। आगे बढ़ने के साथ चौड़ाई कम होती जाती है। नरिया से संकटमोचन मंदिर के पास वह नाले के रूप में आठ फी तक सिमट कर रह गई है।
विज्ञापन
पुराणों में नदी का वर्णन
असि नदी कंदवा स्थित कर्दमेेश्वर महादेव कुंड से शुरू होकर लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद गंगा में मिलती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 14 वर्ग किलोमीटर के दायरे में है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा ने शुंभ-निशुंभ नामक असुरों का वध करने के बाद जहां अपनी तलवार फेंकी थी, उस स्थान पर ही महादेव कुंड बना और इससे निकले पानी से ही असि नदी का उद्गम हुआ। असि नदी और अस्सी घाट का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास की मृत्यु में भी मिलता है।
-10 हजार अवैध निर्माण हो चुके हैं असि के किनारे
-3 लाख की आबादी रहती है इन अवैध निर्माण में
-14 वर्ग किलोमीटर है नदी का जल.ग्रहण क्षेत्र
-30 फीट चौड़ाई है नदी के उद्गम स्थल के पास
कब्जे
-नदी के किनारों को पाट कर छोटे से लेकर कई मंजिला तक आलीशान मकान बन गए हैं।
-असि नदी पर अतिक्रमण करने वाले कई स्कूल भी हैं। साकेत नगर में एक स्कूल ने तो दोनों किनारों पर निर्माण करके उन्हें पुल से जोड़ दिया है।
-शॉपिंग कॉप्लेक्स भी बना दिए गए हैं नदी पर अतिक्रमण करके।
-नाले में तब्दील हो चुकी नदी के किनारे पर कई रेस्टोरेंट भी आबाद हैं
-अतिक्रमण को बकरार रखने के लिए अतिक्रमणकारियों ने कुछ मंदिर भी बना दिए हैं