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बदले मौसम और बदहाल आबोहवा ने बढ़ाई बीमारियां, बरतें यह सावधानियां

Sat, 27 Oct 2018 01:12 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sat, 27 Oct 2018 01:12 PM IST
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Increasing diseases in changing season and pollution in air
उड़ती धूल - फोटो : amar ujala
दिन में तेज धूप और रात में सिहरन। पिछले एक सप्ताह से मौसम में तेजी से बदलाव आया है। ऐसे में सेहत के प्रति जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। अस्पतालों में भी इन दिनों सर्दी, खांसी, गले में संक्रमण आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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सड़क पर उड़ रही धूल भी सेहत के प्रति घातक साबित हो रही है। जगह-जगह खुदाई से उड़ रहा धूल से फेफड़े में संक्रमण का खतरा है। अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर रही है। डॉक्टरों की ओर से लोगों को बदलते मौसम के साथ ही धूल से बचने की सलाह दी जा रही है।
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दिन और रात के तापमान में काफी अंतर है। न्यूनतम तापमान 16 से 17 डिग्री के आसपास जबकि 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है। ऐसे में सबसे अधिक खतरा उन लोगों को है जो पहले से दमा, एलर्जी से पीडि़त हैं।
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मंडलीय अस्पताल के साथ ही बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या में पिछले 10 दिन में करीब 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव के मुताबिक इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चे में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है।

सर सुंदरलाल अस्पताल के टीबी चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉ. जीएन श्रीवास्तव ने बताया कि सड़कों पर उड़ने वाले धूल से बचने की जरूरत है। धूल अंदर जाने पर बलगम, नाक से पानी, जकड़न, आंखों में जलन की संभावना अधिक रहती है। इसके लिए बाहर निकलते समय मॉस्क लगाकर निकला जाए तो बेहतर होगा।

ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी यही सलाह दी जा रही है कि धूल और धुएं से बचें। बीएचयू में क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के प्रमुख प्रो. एमके सिंह ने बताया कि इस समय कंजेक्टिवाइटिस की संभावना रहती है। आंखों में जलन, दर्द और लाल होने की शिकायतें लेकर मरीज आ रहे हैं। बाहर से घर आने पर ठंडे पानी से आंखें जरूर धोएं। 

शहर की आबोहवा हुई खराब 

Increasing diseases in changing season and pollution in air
हवा में प्रदूषण - फोटो : amar ujala
मौसम में बदलाव के साथ आबोहवा खराब हो चली है। एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा में पर्टिकुलेट मेटर की स्थिति मानक से दोगुनी ज्यादा है। बनारस में यह स्थिति दो सप्ताह से बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार रात के तापमान में गिरावट से हवा नम होकर भारी हो रही है। ऐसे में धूल के कण ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी हवा में सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

केयर फॉर एयर की एकता शेखर बताती हैं कि प्रदूषण की स्थिति में कहीं कोई सुधार नहीं है। सड़कों पर धूल की स्थिति वही है। निर्माण कार्य भी उसी गति से हो रहा है। न ही वाहनों से निकलने वाले धुआं कम हुआ है।

अब मौसम बदलने से वातावरण जहरीले गैस चैंबर में तब्दील हो जाएगा और समस्याएं खड़ी करेगा। नाकम स्टेशन से मिलने वाले आंकड़ों के अनुसार बीते दो सप्ताह से बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से अधिक है। पीएम 10 का मानक 100 निर्धारित हैं। यही हाल पीएम 2.5 का भी है। 

ये बरतें सावधानी

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हवा में धूल - फोटो : amar ujala
-पूरी बांह के कपड़े पहनकर ही घर से बाहर निकलें
-रात में मच्छरदानी लगाकर सोयें
-धूल और धुएं से बचने के लिए मास्क लगाकर निकलें  
-एसी में सोने और फ्रीज का पानी पीने से परहेज करें
-मौसमी फल और हरी सब्जियों का सेवन करें
-सर्दी, खांसी, बुखार आदि के लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें  
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